शिक्षक नदारद: डिजिटल निगरानी में खुली स्कूलों की हकीकत, बिलासपुर के चार ब्लॉक में 1618 शिक्षक गैरहाजिर
शिक्षक स्कूल से नदारद तो बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी?

बिलासपुर में स्कूलों की डिजिटल निगरानी ने शिक्षा व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने रखी है, (शिक्षक नदारद) जिसे देखकर सवाल उठना तय है। जिले के चार विकासखंडों में एक-दो नहीं, बल्कि 1618 शिक्षक स्कूलों से गैरहाजिर दर्ज किए गए हैं। इनमें कई ऐसे स्कूल भी हैं, जहां शिक्षक नहीं पहुंचे तो बच्चों की पढ़ाई कैसे हुई… इसका जवाब अब व्यवस्था को देना होगा।
विद्या समीक्षा केंद्र की रिपोर्ट ने उठाए बड़े सवाल (शिक्षक नदारद)
बिलासपुर के सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। विद्या समीक्षा केंद्र की डिजिटल निगरानी में जिले के चार विकासखंडों में 1618 शिक्षक बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित दर्ज किए गए। आंकड़ों पर नजर डालें तो बिल्हा में सबसे ज्यादा 659 शिक्षक, मस्तूरी में 384, तखतपुर में 323 और कोटा में 252 शिक्षक गैरहाजिर पाए गए। यानी सवाल सिर्फ शिक्षकों की हाजिरी का नहीं, बल्कि उन बच्चों की पढ़ाई का है, जो रोज उम्मीद लेकर स्कूल पहुंचते हैं।
ग्रामीण इलाकों के कई स्कूलों की तस्वीर भी सामने आई है। कहीं शिक्षक नहीं पहुंचे तो बच्चों को इंतजार करना पड़ा और कहीं पूरा स्टाफ ही अनुपस्थित दर्ज हुआ। खास बात यह है कि गैरहाजिरी का मामला केवल सामान्य सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं है। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में भी शिक्षक अनुपस्थित मिले हैं। जिस व्यवस्था को बेहतर शिक्षा और अनुशासन की मिसाल के तौर पर पेश किया जाता है, उसी में शिक्षकों की गैरहाजिरी अब सवालों के घेरे में है।
विद्या समीक्षा केंद्र की डिजिटल निगरानी ने गैरहाजिर शिक्षकों की स्थिति सामने जरूर रख दी है, लेकिन अब असली सवाल कार्रवाई का है। क्या बिना सूचना स्कूल से गायब रहने वाले शिक्षकों पर जवाबदेही तय होगी? क्या सिर्फ डिजिटल हाजिरी दर्ज होने से व्यवस्था सुधरेगी या जमीन पर भी निगरानी और कार्रवाई होगी? क्योंकि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को भी नियमित शिक्षक, गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई और अपने भविष्य का भरोसा चाहिए।





