Unfinished Houses: 30-40 वर्षों से आबादी भूमि पर निवासरत परिवार ने शिकायत को बताया निराधार, प्रधानमंत्री आवास की किस्त जारी करने की मांग
आवास निर्माण पर आपत्ति से रुकी तीसरी किस्त, अधूरे मकान और बारिश में झोपड़ी में रहने को मजबूर परिवार

तखतपुर तहसील के ग्राम जरेली निवासी एक परिवार ने उनके आवास निर्माण को लेकर की गई शिकायत को निराधार बताते हुए प्रशासन से प्रधानमंत्री आवास योजना की रुकी हुई किस्त जारी करने की मांग की है। (Unfinished Houses) परिवार का कहना है कि ग्राम जरेली के खसरा नंबर 195/1 स्थित आबादी भूमि पर वे पिछले 30 से 40 वर्षों से निवास कर रहे हैं। उनके अनुसार ग्रामवासियों की सहमति से उन्हें नर्मदा नदी के किनारे सड़कपारा वार्ड क्रमांक 1 के पास पौनी-पसारी के रूप में बसाया गया था और तब से वे जचकी कार्य करते हुए अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
अधूरे मकान और बारिश में झोपड़ी में रहने को मजबूर परिवार (Unfinished Houses)
परिवार का दावा है कि वे भूमिहीन हैं तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कुसुम बाई और मुठंकी बाई लहरे के नाम स्वीकृत आवास के लिए पुराने कच्चे मकान को तोड़कर पक्का मकान बना रहे हैं। हालांकि निर्माण को लेकर आपत्ति दर्ज होने के कारण योजना की तीसरी किस्त जारी नहीं हो पा रही है, जिससे मकान अधूरा पड़ा हुआ है।
परिवार का कहना है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे फिलहाल झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर हैं। लगातार हो रही बारिश से उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर शिकायत को निराधार घोषित करते हुए आवास निर्माण पूर्ण कराने के लिए लंबित किस्त जल्द जारी करने की मांग की है।





