जानलेना हमला: बिलासपुर में ‘सुपारी किलिंग’ का खुलासा, कांग्रेस नेता की जान लेने के लिए रची गई साजिश..
नगर निगम की 'कुंभकरणीय' नींद की वजह से हुआ जानलेवा हमला,

बिलासपुर में कांग्रेस नेता श्याम कश्यप पर हुए जानलेवा हमले की पुलिस ने गुत्थी सुलझा ली है।(जानलेना हमला) यह मामला आपसी रंजिश नहीं, बल्कि बकायदा 5-5 लाख रुपये की सुपारी देकर की गई हत्या की कोशिश है। हालांकि, इस पूरे मामले में पीड़ित श्याम कश्यप ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। कश्यप का साफ आरोप है कि अगर निगम ने अवैध निर्माण पर समय रहते और कानून सम्मत कार्रवाई की होती, तो शायद उन्हें आज इस प्राण घातक हमले का सामना नहीं करना पड़ता.
पीड़ितों ने लगाए गंभीर आरोप (जानलेना हमला)
मामला 4 जुलाई की सुबह का है, जब कांग्रेस नेता श्याम कश्यप मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। तभी रेलवे अस्पताल के पास नकाबपोश बदमाशों ने उन पर डंडों से जानलेवा हमला कर दिया। पुलिस ने सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दो आरोपियों, नितिन टेकाम और एक अपचारी बालक को हिरासत में ले लिया है। आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि गौरेला-पेंड्रा निवासी दीपक तिवारी ने उन्हें हत्या की वारदात को अंजाम देने के लिए 5-5 लाख रुपये का प्रलोभन दिया था।

पीड़ित श्याम कश्यप ने प्रशासन और निगम पर अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि यह हमला महज अचानक नहीं हुआ, बल्कि नगर निगम के आला अफसरों की उदासीनता का नतीजा है। कश्यप ने आरोप लगाया कि वे पिछले डेढ़ साल से अपने क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगा रहे थे। उन्होंने इसके लिए दफ्तरों के चक्कर काटने के साथ-साथ बड़े नेताओं तक को लिखित शिकायत दी, लेकिन नगर निगम के अधिकारी ‘कुंभकरणीय’ निद्रा में सोते रहे और उनकी शिकायतों को नजरअंदाज करते रहे…
पीड़ित का यह भी आरोप है कि मामले में हाईकोर्ट के आदेशों तक की अनदेखी की गई। यदि नियम और कानून के दायरे में रहकर अवैध निर्माण को समय पर ढहा दिया जाता, तो शायद आज यह स्थिति नहीं बनती। कश्यप का कहना है कि उनकी लगातार मांग के बावजूद निगम की ढुलमुल कार्यप्रणाली के चलते अपराधियों के हौसले बुलंद होते गए और अंततः उन्हें अपनी जान दांव पर लगानी पड़ी..
इस मामले पर एएसपी पंकज पटेल ने जानकारी दी कि पुलिस मामले की जड़ तक पहुँचने के लिए जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, मुख्य साजिशकर्ता दीपक तिवारी और उसका साथी साहिल सोनकर अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, जिनकी तलाश में टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। फिलहाल, पकड़े गए आरोपियों को जेल भेज दिया गया है और उन पर बीएनएस की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। सवाल यह है कि कब तक नगर निगम अपनी फाइलों में दबी शिकायतों पर जागता है और कब फरार आरोपियों की गिरफ्तारी होती है.





