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ज्ञापन: बिलासपुर में जलभराव पर सियासी संग्राम, प्रभावितों के लिए मुआवजे और स्थायी समाधान की मांग को लेकर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

प्रभावित परिवारों ने सरकार से की एक करोड़ की सहायता और हर घर में सुरक्षा की मांग......

बिलासपुर में जलभराव की स्थिति ने शहर के जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।(ज्ञापन) हालात इतने विकट हैं कि अब इसे लेकर सियासी और सामाजिक गलियारों में आक्रोश गहराने लगा है। आज प्रशासन के समक्ष प्रभावित नागरिकों की ओर से एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें आपदा प्रबंधन की विफलताओं पर निशाना साधते हुए तत्काल राहत, उचित मुआवजे और भविष्य के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाने की जोरदार मांग की गई है

आपदा प्रबंधन पर उठे सवाल (ज्ञापन)

जलभराव की मार झेल रहे नागरिकों का गुस्सा अब सड़कों पर उतर आया है। जिला कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में प्रभावितों ने सरकार की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को पूरी तरह से फेल बताया है। आरोप है कि शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक हजारों परिवारों की मेहनत की कमाई पानी में बह गई है। घरों में रखा सामान, दुकानें और वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ज्ञापन के जरिए मांग की गई है कि प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वे कर पीडितों को उनके नुकसान का पूर्ण मुआवजा दिया जाए।

ज्ञापन में कई प्रमुख और व्यावहारिक मांगे रखी गई हैं। इसमें प्रत्येक वार्ड और पंचायत स्तर पर एनडीआरएफ (NDRF) जैसी प्रशिक्षित आपदा टीम की स्थायी तैनाती और हर परिवार को आपदा के समय सुरक्षित निकालने के लिए रबर बोट उपलब्ध कराने की मांग शामिल है। इतना ही नहीं, प्रभावितों ने प्रशासन पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए मांग की है कि जिस तरह सरकारी आवासों में जल निकासी के लिए मोटर पंप लगाए गए हैं, उसी तरह आम नागरिकों के घरों में भी पंपों की व्यवस्था की जाए ताकि भविष्य में जलभराव के दौरान तत्काल राहत मिल सके।

सबसे महत्वपूर्ण और बड़ी मांग के तहत ज्ञापन में कहा गया है कि यदि जलभराव के दौरान करंट लगने से किसी नागरिक की मृत्यु होती है, तो पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को शासकीय नौकरी दी जानी चाहिए। प्रशासन को यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि जनहित में त्वरित और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में एक बड़ा जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। फिलहाल, इस ज्ञापन के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा है और अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इन मांगों पर क्या रुख अपनाता है

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