जमीयत उलेमा-ए-हिंद की बैठक में मौलाना मदनी बोले- देश में बढ़ रही डर और नफरत की राजनीति

जमीयत उलेमा-ए-हिंद की दो दिवसीय कार्यसमिति बैठक के समापन पर संगठन के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने देश के मौजूदा हालात को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश में अब नफरत की राजनीति के साथ-साथ डर और धमकी की राजनीति भी बढ़ रही है।

मौलाना मदनी ने कहा कि मुसलमानों को यह एहसास दिलाने की कोशिश की जा रही है कि उन्हें शर्तों पर जीवन बिताना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग सत्ता पाने के लिए देश के अमन, भाईचारे और एकता के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कई राज्यों में मुसलमानों को सार्वजनिक रूप से धमकियां दी जा रही हैं और संविधान की भावना के खिलाफ बयान दिए जा रहे हैं। मदनी ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी पसंद के नेता को वोट देने का अधिकार है और किसी को वोट न देना अपराध नहीं हो सकता।

मौलाना मदनी ने समान नागरिक संहिता, वंदे मातरम् को अनिवार्य किए जाने और मदरसों के खिलाफ हो रही कार्रवाई पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जमीयत इन मुद्दों पर कानूनी लड़ाई लड़ रही है और आगे भी लड़ती रहेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि मस्जिदों, मदरसों और धार्मिक संस्थानों को निशाना बनाया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर मुसलमानों के मताधिकार को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।

मौलाना मदनी ने मुसलमानों से सतर्क और जागरूक रहने की अपील करते हुए कहा कि सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखें और किसी भी प्रक्रिया को सावधानी से पूरा करें।

उन्होंने कहा कि भारत का मुसलमान देशभक्त है और संविधान ने उसे बराबरी का अधिकार दिया है। उन्होंने कहा कि मुसलमान डर या दबाव में झुकने वाला नहीं है और किसी भी स्थिति में दूसरे दर्जे का नागरिक बनना स्वीकार नहीं करेगा।

बैठक के अंत में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने देश में भाईचारा, न्याय और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।

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