Masturi Firing Incident Revealed: मस्तूरी गोलीकांड का खुलासा, निष्कासित नेता विश्वजीत अनंत बना खूनी साज़िश का मास्टरमाइंड
Masturi Firing Incident Revealed: 24 घंटे में 7 आरोपी गिरफ्तार

बिलासपुर की सियासत में रंजिश की आग इतनी भड़क गई कि बात सीधे बंदूक की नाल तक पहुंच गई। मस्तूरी में हुई गोलीबारी ने जिले की राजनीति हिला दी है।(Masturi Firing Incident Revealed) एक तरफ जनपद उपाध्यक्ष नितेश सिंह, तो दूसरी तरफ कांग्रेस से निष्कासित युवा नेता विश्वजीत अनंत… दोनों के बीच चली वर्चस्व की जंग ने इलाके को गोलियों की बरसात में तब्दील कर दिया।
राजनीतिक वर्चस्व की जंग में बरसी गोलियां(Masturi Firing Incident Revealed)
घटना 28 अक्टूबर की शाम करीब छह बजे की है। मस्तूरी जनपद कार्यालय के बाहर नितेश सिंह अपने साथियों के संग बैठे थे, तभी दो मोटरसाइकिलों पर सवार हमलावर पहुंचे और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। लगातार 12 से 15 राउंड गोलियां चलीं जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। गोली राजू सिंह और चंद्रकांत सिंह को लगी, लेकिन नितेश सिंह कार के पीछे छिपकर बाल-बाल बच गए। जवाबी फायरिंग होते ही हमलावर बाइक स्टार्ट कर मौके से फरार हो गए। पुलिस जांच में सामने आया कि यह हमला दो साल पुरानी वर्चस्व की लड़ाई का नतीजा था।निष्कासित नेता विश्वजीत अनंत और जनपद उपाध्यक्ष नितेश सिंह के बीच पुराना विवाद कांग्रेस भवन से शुरू होकर मॉल तक पहुंचा था।जेल, केस और रंजिश की इस कहानी का क्लाइमैक्स 28 अक्टूबर को गोलीबारी के रूप में हुआ।
बदले की आग में झुलसी सियासत,Masturi Firing Incident Revealed
पुलिस के मुताबिक पहले 25 अक्टूबर को इस वारदात की योजना बनी थी, लेकिन फेल हो गई। फिर 28 अक्टूबर को सबकुछ प्लान के मुताबिक किया गया।
निष्कासित नेता विश्वजीत अनंत बना खूनी साज़िश का मास्टरमाइंड(Masturi Firing Incident Revealed)
.पुलिस ने जब जांच की रफ्तार बढ़ाई तो पूरी साज़िश की तस्वीर साफ़ होती चली गई। एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देशन में बनी छह स्पेशल टीमों ने महज़ 24 घंटे में सातों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें मुख्य साज़िशकर्ता विश्वजीत अनंत, उसके भाई अरमान और चाहत, साथ ही मोहम्मद मुस्तकीम, मोहम्मद मतीन और दो नाबालिग शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से दो देशी पिस्टल, एक कट्टा, पांच मैगज़ीन, जिंदा कारतूस और कई मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जांच में यह बात भी सामने आई कि वारदात के लिए क्षेत्र के तारकेश्वर पाटले ने एक लाख रुपये की फंडिंग की थी, जिसे विश्वजीत ने अपने साथियों में बांटा था। यानी ये हमला कोई अचानक हुआ झगड़ा नहीं, बल्कि राजनीतिक वर्चस्व दिखाने की सोची-समझी साज़िश थी, जिसमें बदले की आग को गोलियों में बदला गया।





