न्याय की गुहार: पीएमओ पर भारी पड़ा तात्कालिक रतनपुर पटवारी
10 साल से इंसाफ की आस में किसान..

बिलासपुर में सिस्टम की मार झेल रहा एक कैंसर पीड़ित (न्याय की गुहार) बुजुर्ग किसान अब अपने हक के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। रतनपुर के किसान दीपक कुमार की जमीन करीब 10 साल पहले NH-45 के लिए अधिग्रहित की गई थी। लेकिन किसान का आरोप है कि आज तक उसे पूरी मुआवजा राशि नहीं मिली और न ही जमीन वापस की गई। थक-हारकर किसान ने पीएमओ तक शिकायत की। दिल्ली से टीम जांच के लिए पहुंची, जमीन का निरीक्षण हुआ और रिपोर्ट भी सौंपी गई, लेकिन इसके बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
जमीन गई, मुआवजा अटका… 10 साल से दफ्तरों के चक्कर काट रहा किसान (न्याय की गुहार)
किसान के मुताबिक रतनपुर के खसरा नंबर 883/19 और 883/20 में उसकी हिस्सेदारी है। 883/19 की मुआवजा राशि अब तक नहीं मिली, जबकि 883/20 की करीब दो लाख रुपये की राशि भी बाकी बताई जा रही है। किसान का कहना है कि वह एसडीएम कार्यालय में कई बार आवेदन दे चुका है और कलेक्टर कार्यालय से लेकर संबंधित अधिकारियों तक गुहार लगा चुका है, लेकिन उसे अब तक राहत नहीं मिली।
PMO जांच के बाद भी नहीं मिला न्याय..
सबसे दर्दनाक बात यह है कि किसान के पिता कैंसर से पीड़ित हैं और लगातार दफ्तरों के चक्कर लगाना परिवार के लिए बेहद मुश्किल हो गया है। किसान ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संबंधित पटवारी द्वारा मुआवजे के बदले कथित तौर पर अलग से जमीन की मांग की गई। मांग पूरी नहीं करने पर मामला और उलझ गया।रोते हुए किसान ने कलेक्टर दरबार में अपना दर्द सुनाया। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने शिकायत की जांच कर आगे कार्रवाई का भरोसा दिया है।
अब सवाल यही है।दस साल से भटक रहे इस किसान को आखिर कब मिलेगा उसका हक?
एक तरफ कैंसर से जूझता परिवार, दूसरी तरफ अपने ही हक के लिए दस साल से भटकता किसान। सवाल सिर्फ मुआवजे का नहीं, बल्कि इंसाफ का है। आंखों में उम्मीद और दिल में दर्द लिए यह परिवार अब भी प्रशासन की ओर देख रहा है कि आखिर कब मिलेगा उसे उसका अधिकार…





