Government Claims Fail: धान बेचने जनदर्शन पहुंचे किसान
खरीदी खत्म होने में 10 दिन,चिंता में किसान

धान खरीदी को लेकर सरकार और प्रशासन की बार-बार बदलती नीतियां (Government Claims Fail) अब किसानों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनती जा रही हैं। खरीफ सीजन 2025-26 की शुरुआत में सरकार ने बड़े भरोसे के साथ कहा था एक-एक दाना धान खरीदा जाएगा। लेकिन अब, जब धान खरीदी अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। तब भी सैकड़ों किसान अपनी उपज बेचने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
धान खरीदी के वादे हवा-हवाई, किसान दर-दर भटकने को मजबूर
आज यही पीड़ा लेकर कई किसान जनदर्शन में कलेक्टर के सामने पहुंचे। हाथों में आवेदन और आंखों में आंसू लिए किसान सिर्फ एक ही गुहार लगाते नजर आएसाहब, हमारी धान तो बिकवा दीजिए किसानों का कहना है कि वे ढाई महीने से ज्यादा समय से पंजीयन की समस्या झेल रहे हैं। एग्रीस्टेट पोर्टल में रजिस्ट्रेशन नहीं होने के कारण उनकी धान खरीदी ही नहीं हो पा रही। किसान लगातार अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, समाधान नहीं।
आंखों में आंसू,हाथों में आवेदन किसान ने कहा-साहब,हमारी धान तो बिकवा दीजिए
किसानों ने मीडिया के सामने दर्द बयां करते हुए बताया कि अब उनसे कहा जा रहा है कि कागज रायपुर भेजे गए हैं, वहीं से प्रक्रिया पूरी होगी। सवाल यह है कि जब खरीदी के सिर्फ 10 दिन ही शेष हैं, तब रायपुर भेजे गए कागज कब लौटेंगे और किसान कब अपनी फसल बेच पाएंगे?एक किसान ने भावुक होकर कहा अगर हमारे खून-पसीने की कमाई नहीं बिकी, तो हमारे सामने जीने का रास्ता ही नहीं बचेगा।यह बयान प्रशासन और सरकार दोनों के लिए एक खतरनाक चेतावनी है।वहीं, कुछ किसानों ने धान खरीदी केंद्र प्रभारियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
खरीदी खत्म होने में 10 दिन,चिंता में किसान,रायपुर भेजे कागज,कब मिलेगा न्याय? (Government Claims Fail)
एक किसान ने बताया कि उसका ई-टोकन किसी और के नाम जारी कर दिया गया, जिसके चलते वह अपनी धान बेचने से वंचित रह गया। सिस्टम की खामियां और कर्मचारियों की लापरवाही किसानों को मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ रही है। किसानों का यह भी आरोप है कि सरकार 21 क्विंटल धान खरीदी का वादा करती है, लेकिन हकीकत में सिर्फ 18 क्विंटल ही खरीदा जा रहा है। यही वजह है कि खेतों में सोना उगाने वाला किसान आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार और प्रशासन आखिरी वक्त में किसानों को राहत दे पाएंगे?या फिर यह धान खरीदी भी सिर्फ घोषणाओं और वादों की भेंट चढ़ जाएगी?किसान सड़क पर हैं, जनदर्शन में हैं, और अब सबकी नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है।





