Electricity Office Power Cut Off: निजीकरण की पोल खुली बिजली दफ्तर में अंधेरे में टॉर्च से काम
Electricity Office Power Cut Off: व्यवस्था सुधरने के दावे फेल,बिजली दफ्तर खुद बिजलीहीन

निजीकरण से व्यवस्था चमकाने के दावे हकीकत में कितने खरे उतर रहे हैं, इसका ताज़ा उदाहरण बिलासपुर में साफ दिखाई देता है।(Electricity Office Power Cut Off) हालत यह है कि आमजन तो दूर, खुद विद्युत वितरण कंपनी का स्टाफ भी इस व्यवस्था से परेशान है।सुबह से ही बिजली दफ्तर की बिजली बंद रही।
निजीकरण ने बढ़ाई दिक्कतें
पूरा स्टाफ अंधेरे में मोबाइल के टॉर्च की रोशनी में काम करता नजर आया। दूसरी तरफ उपभोक्ता चक्कर काट–काटकर थक चुके हैं। गोलबाजार के व्यवसायी अमित लोगिनी पिछले दो महीने से मीटर में नाम परिवर्तन और लोड बढ़वाने का आवेदन लेकर श्याम टॉकीज और जोन कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अफसरों के पास हर बार एक ही जवाब मीटिंग में हैं।अमित पर ओवरलोड का हर महीने दो हजार रुपए जुर्माना लगाया जा रहा है।
अंधेरे में बैठा विभाग,भटके उपभोक्ता
लोड बढ़ाने आवेदन दिया तो कह दिया गया—पहले नाम बदलवाओ। नाम बदलवाने गए तो फॉर्म में नई आपत्तियाँ जोड़ दी गईं। (Electricity Office Power Cut Off) तंग आकर वे जोन कार्यालय पहुँचे, जहाँ ईई भारत भूषण नेताम ने खुद फॉर्म ओके किया। पर दो कमरे वाले ऑफिस के इंजीनियर अब कह रहे हैं कि “फाइल बाबू के टेबल पर है, आएगी तब देखेंगे।इसके पहले भी निजी फर्मों की लापरवाही से शहर को बड़ा नुकसान हुआ है।
निजीकरण के नाम पर जनता त्रस्त, अफसर मस्त
नगर निगम के राजस्व वसूली के लिए नियुक्त रांची की स्पैरो इंफोटेक कंपनी करोड़ों का डेटा लेकर गायब हो गई, लेकिन आज तक अफसर जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं कि आखिर निगम को कितनी चपत लगी।इतने उदाहरणों के बाद भी निजीकरण का प्रेम कम नहीं हो रहा। सवाल बड़ा है।क्या सिस्टम में सुधार हो रहा है, या फिर जनता और कर्मचारी दोनों ही निजीकरण की कीमत चुका रहे हैं?





