Chhattisgarhi Society Anger: रेलवे स्टेशन पर गूंजे बिहार के गीत,छत्तीसगढ़िया समाज ने जताया रोष
Chhattisgarhi Society Anger: छत्तीसगढ़िया बोले- हमर गीत ला काबर भुला देहे

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेलवे स्टेशन से एक नई बहस शुरू हो गई है। (Chhattisgarhi Society Anger) वजह है स्टेशन पर बज रहे छठ पूजा के गीत। बिहार की इस परंपरा से जुड़े गीतों पर अब छत्तीसगढ़िया समाज ने सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि जब हम अपने तिहारों में अपनी संस्कृति को जगह नहीं दे पा रहे हैं, तो फिर दूसरे प्रदेशों के गाने क्यों?
भोजपुरी गानों से गुंजा स्टेशन,छत्तीसगढ़िया गीत रहे गायब,Chhattisgarhi Society Anger
बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर आज से छठ महापर्व की शुरुआत के साथ ही छठ गीतों की गूंज सुनाई देने लगी।(Chhattisgarhi Society Anger) स्टेशन के सभी प्लेटफार्मों पर “उठल बिहान सूर्य देव” और “कांच ही बांस के बहंगिया” जैसे भोजपुरी गीत बज रहे हैं। लेकिन इसी के साथ एक नया विवाद भी खड़ा हो गया हैछत्तीसगढ़िया समाज और स्थानीय संगठनों ने इस पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ की अपनी भी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा है।देवारी तिहार, गौरा गौरी पूजा, गोवर्धन पूजा, मातर पर्व जैसे लोक उत्सव हमारे गौरव हैं। लेकिन सरकार और रेलवे प्रशासन इन तिहारों को बढ़ावा देने के बजाय दूसरे राज्यों की संस्कृति को प्राथमिकता दे रहे हैं। जिस पर छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के सदस्यो ने नाराजगी जताते हुवे कहा कि हमारे अपने त्योहारों में छत्तीसगढ़ी गीत तक नहीं बजाए जाते।गौरा-गौरी, गोवर्धन पूजा, मातर जैसे तिहारों का जिक्र कहीं नहीं है, लेकिन बिहार के गीत रेलवे स्टेशन में गूंज रहे हैं। ये छत्तीसगढ़ की संस्कृति के साथ अन्याय है।”
छत्तीसगढ़िया समाज ने जताया रोष
आरोप है कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार छठ जैसे बाहरी पर्व को तो बढ़ावा दे रही है, लेकिन छत्तीसगढ़ की परंपरा और लोकगीतों को नज़रअंदाज किया जा रहा है। (Chhattisgarhi Society Anger) छत्तीसगढ़िया संगठनों ने कहा कि यह केवल एक गाने या पर्व की बात नहीं है, बल्कि पहचान और अस्मिता” का सवाल है।उनका कहना है कि जब दूसरे प्रदेशों के पर्वों का सम्मान किया जा रहा है, तो छत्तीसगढ़ के लोकसंगीत, पंथी गीत, राऊत नाचा और देवारी गीतों को क्यों नहीं मंच दिया जा रहा?
छत्तीसगढ़ी संस्कृति की चुप्पी से समाज नाराज,Chhattisgarhi Society Anger
फिलहाल रेलवे प्रशासन ने इस विवाद पर कोई बयान नहीं दिया है। (Chhattisgarhi Society Anger) लेकिन यह मुद्दा अब सिर्फ गानों तक सीमित नहीं रहा।यह छत्तीसगढ़ की संस्कृति बनाम राजनीति का सवाल बन चुका है।अब देखना होगा कि सरकार इस नाराजगी को कैसे शांत करती है।और क्या छत्तीसगढ़िया गीतों को भी रेलवे स्टेशन पर वही जगह मिल पाएगी, जो आज छठ गीतों को मिली है?





