रायपुर में पार्किंग माफियाओं का आतंक: करोड़ों की जीएसटी चोरी, प्रशासन और जीएसटी विभाग मौन

रायपुर। राजधानी रायपुर में पार्किंग माफियाओं का जाल इस कदर फैल चुका है कि अब यह करोड़ों रुपए की जीएसटी चोरी का बड़ा मामला बन गया है। सरकारी दफ्तरों, अस्पतालों, बस स्टैंड और एयरपोर्ट जैसे स्थानों पर ठेका लेकर काम करने वाले कई पार्किंग संचालक बिना जीएसटी नंबर के खुलेआम वसूली कर रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, शहर के कलेक्टर कार्यालय, जिला अस्पताल, अंबेडकर अस्पताल, डीकेएस, एएस हॉस्पिटल, बस स्टैंड, एयरपोर्ट, तहसील और बिजली विभाग के गुढियारी कार्यालय समेत कई सरकारी परिसरों में पार्किंग माफिया सक्रिय हैं। इन ठेकेदारों ने न तो जीएसटी पंजीयन कराया है और न ही किसी प्रकार का टैक्स जमा किया जा रहा है। इससे सरकार को हर साल करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है।

एएस हॉस्पिटल बना पार्किंग माफियाओं का अड्डा

सबसे चौंकाने वाली स्थिति एएस हॉस्पिटल परिसर में देखने को मिल रही है। यहां ठेकेदार न केवल जीएसटी चोरी कर रहा है, बल्कि उसने पत्रकारों और प्रेस वाहनों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। प्रतिदिन लगभग छह हजार वाहन यहां पार्क होते हैं, लेकिन किसी को रसीद नहीं दी जाती। प्रति वाहन 20 से 30 रुपए वसूले जा रहे हैं, जिससे हर महीने लाखों की नकद वसूली हो रही है, पर सरकार को एक पैसा नहीं मिल रहा।

गुंडागर्दी से चल रहा है सिस्टम

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि कोई वाहन मालिक पार्किंग की रसीद मांगता है, तो पार्किंग स्टाफ धमकाने और गाली-गलौज पर उतर आता है। कई बार मारपीट की घटनाएं भी हुईं, लेकिन पुलिस कार्रवाई से बचती रही। बताया जा रहा है कि कुछ छुटभैये राजनीतिक नेताओं के संरक्षण में ये माफिया खुलेआम अवैध वसूली कर रहे हैं।

राजस्व को करोड़ों का नुकसान

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सभी ठेकों की सही जांच की जाए, तो करोड़ों रुपए की कर चोरी का बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। जीएसटी विभाग और नगर निगम की लापरवाही ने माफियाओं का हौसला और बढ़ा दिया है।

जनता में आक्रोश, कार्रवाई की मांग

आम नागरिकों और पत्रकार संगठनों ने मांग की है कि सरकार एक विशेष जांच दल (SIT) बनाकर पूरे प्रदेश में पार्किंग ठेकों की समीक्षा करे। पत्रकारों पर प्रतिबंध को लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया गया है।

राजधानी रायपुर में सरकारी परिसरों के भीतर इस तरह की अवैध वसूली प्रशासनिक साख पर सवाल खड़े कर रही है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला राज्य में एक बड़े राजस्व घोटाले का रूप ले सकता है।

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