बड़ा हादसा: तेज रफ्तार कार की टक्कर से फ्लिपकार्ट इंजीनियर गंभीर घायल, नाबालिग के कार चलाने का आरोप……

15-16 साल के बच्चों को किसने दी कार चलाने की अनुमति? परिवार ने सख्त कार्रवाई के साथ रखी अनोखी मांग।

बिलासपुर के सरकंडा में तेज रफ्तार कार की टक्कर से 26 वर्षीय इंजीनियर समीर खान गंभीर रूप से घायल हो गए। (बड़ा हादसा) हादसा स्वर्णिम ऐरा के पास हुआ, जहां कार में तीन नाबालिगों के सवार होने की बात सामने आई है। परिजनों का आरोप है कि कार नाबालिग चला रहा था। घटना के बाद परिवार ने चालक और वाहन मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, एएसपी पंकज पटेल ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और नाबालिगों की पहचान होने पर उनके परिजनों के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही है। इस हादसे ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर नाबालिगों के हाथ में चार पहिया वाहन कैसे पहुंच रहे हैं और ऐसी लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा…?

परिवार ने सख्त कार्रवाई के साथ रखी अनोखी मांग। (बड़ा हादसा)

सरकंडा के स्वर्णिम ऐरा के पास हुए इस हादसे में फ्लिपकार्ट कंपनी में इंजीनियर के पद पर काम करने वाले 26 वर्षीय समीर खान गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के मुताबिक, तेज रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मार दी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। परिजनों का कहना है कि कार में तीन नाबालिग सवार थे और वाहन भी नाबालिग चला रहा था।

घायल समीर के भाई साहिल खान ने घटना को लेकर चिंता जताते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, चालक की उम्र, हादसे की परिस्थितियों और वाहन मालिक की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। घटना ने एक बार फिर नाबालिगों को वाहन सौंपने और यातायात नियमों की अनदेखी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर कम उम्र के बच्चों को कार चलाने की अनुमति कौन दे रहा है और अगर कोई हादसा हो जाए, तो इसकी जिम्मेदारी कौन उठाएगा….????

15-16 साल के बच्चों को किसने दी कार चलाने की अनुमति?

मामले को लेकर एएसपी पंकज पटेल ने उच्चस्तरीय जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहा कि नाबालिगों की पहचान कर उनके परिजनों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, घायल के परिवार ने कानूनी कार्रवाई के साथ एक अलग मांग भी रखी है। परिवार का सुझाव है कि संबंधित नाबालिगों को दो से तीन दिन अस्पताल में घायल समीर की सेवा करने के लिए भेजा जाए, ताकि उन्हें अपनी जिम्मेदारी और लापरवाही के परिणाम का एहसास हो सके। हालांकि, यह परिवार की ओर से रखी गई मांग है, किसी घोषित कानूनी कार्रवाई का हिस्सा नहीं। अब परिवार की मांग है कि पुलिस हादसे की निष्पक्ष जांच करे, चालक की उम्र की पुष्टि करे और वाहन किसकी अनुमति से चलाया जा रहा था, इसकी भी जांच करे…..

यह घटना केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और अभिभावकों की जिम्मेदारी से जुड़ा गंभीर सवाल भी है। नाबालिगों को वाहन सौंपना न सिर्फ उनकी, बल्कि सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल सकता है। एक तरफ समीर खान अस्पताल में उपचार करा रहे हैं, तो दूसरी तरफ उनका परिवार न्याय और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठा है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है……..

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