साइबर ठगी का शिकार: कमीशन के लालच में च्वाइस सेंटर संचालक बने साइबर ठगी का शिकार
क्यूआर कोड से खातों में डलवाए ठगी के रुपये, नकदी लेकर फरार हुआ आरोपी, कई जिलों के संचालक प्रभावित..

साइबर ठगी करने वालों ने अब च्वाइस सेंटर और ग्राहक सेवा केंद्र संचालकों को निशाना बनाने का नया तरीका अपनाया। (साइबर ठगी का शिकार) कमीशन का लालच देकर पहले उनके बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई जाती थी और फिर बदले में नकदी लेकर आरोपी निकल जाता था। बाद में जब खातों में आई रकम साइबर ठगी से जुड़ी मिली, तो संचालकों के बैंक खाते होल्ड कर दिए गए। बिलासपुर के अलावा रायपुर, भाटापारा, तिल्दा और अन्य क्षेत्रों के संचालकों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। आरोपी पकड़ा जा चुका है, लेकिन पीड़ितों के सामने अब अपने पैसे वापस पाने और बैंक खाते चालू कराने की चिंता है..
बिलासपुर से रायपुर, भाटापारा, तिल्दा तक फैला ठगी का मामला, (साइबर ठगी का शिकार)
मामला च्वाइस सेंटर संचालकों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर साइबर ठगी की रकम को नकदी में बदलने से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, आरोपी अलग-अलग क्षेत्रों में च्वाइस सेंटर पहुंचता था और नकदी की जरूरत बताकर संचालकों से क्यूआर कोड के जरिए अपने खाते में रकम ट्रांसफर करवाता था।
इसके बदले संचालक को कुछ कमीशन या सर्विस चार्ज मिलता था। संचालक इसे सामान्य लेनदेन समझकर खाते में आई रकम नकद दे देते थे, लेकिन कुछ दिन बाद जब उस रकम का संबंध साइबर फ्रॉड से सामने आया, तो बैंक खातों को होल्ड कर दिया गया। बिलासपुर जिले में भी कई संचालकों के साथ इसी तरीके से ठगी की शिकायतें सामने आई हैं। शिकायत में सात अन्य संचालकों के प्रभावित होने का भी उल्लेख है। वहीं, दूसरे क्षेत्रों के संचालकों के भी इसी तरह ठगी का शिकार होने की जानकारी सामने आई है।
आरोपी पकड़ा गया, खातों से होल्ड हटने और रकम वापसी का इंतजार…
तखतपुर के च्वाइस सेंटर संचालक शशि कुमार साहू ने बताया कि एक व्यक्ति उनकी दुकान पर नकदी लेने पहुंचा था। आधार कार्ड से पैसे नहीं निकलने की बात कहकर उसने क्यूआर कोड के जरिए उनके खाते में 20 हजार रुपये ट्रांसफर करवाए। इसके बाद निर्धारित चार्ज काटकर उसे नकदी दे दी गई। दो से तीन दिन बाद उनका बैंक खाता होल्ड हो गया। बैंक से जानकारी लेने पर पता चला कि साइबर सेल की कार्रवाई के चलते खाता रोका गया है और बाद में तमिलनाडु पुलिस की सिफारिश पर कार्रवाई होने की जानकारी मिली।
शशि कुमार साहू के मुताबिक, इस तरह की धोखाधड़ी से जुड़े संचालकों की कुल रकम करीब पांच लाख रुपये बताई जा रही है। आरोपी पकड़ा जा चुका है और उससे करीब 87 हजार रुपये बरामद होने की जानकारी मिली है। हालांकि, पीड़ितों को अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी रकम कब और कैसे वापस मिलेगी और बैंक खातों से होल्ड कब हटेगा….
तिल्दा निवासी विक्की ने बताया कि क्यूआर कोड के जरिए हुई इस धोखाधड़ी से प्रभावित संचालकों ने आपस में ग्रुप बनाया और आगे की कार्रवाई की जानकारी लेने के लिए साइबर थाने पहुंचे। उनका कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब सभी संचालक इस इंतजार में हैं कि आगे क्या कार्रवाई होती है और उन्हें राहत कब मिलती है।
फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ी चिंता उन संचालकों की है, जिनके बैंक खाते होल्ड होने से रोजमर्रा का लेनदेन प्रभावित हो रहा है। अब पुलिस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगा कि कितनी रकम की ठगी हुई, कितनी राशि बरामद हुई और पीड़ितों को उनकी रकम वापस दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे…..





