शासकीय अस्पताल मे प्राइवेट क्लिनिक: अस्पताल में ‘अवैध’ दुकान बिलासपुर जिला अस्पताल परिसर में खुला निजी डेंटल क्लीनिक, मिलीभगत से मरीजों को रेफर करने का नया खेल…..
नियम ताक पर! जिला अस्पताल में बिना अनुमति चल रहा त्रिवेणी डेंटल सैटेलाइट क्लीनिक, साख दांव पर लगाकर निजी कॉलेज को फायदा पहुँचाने का आरोप......

सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की नाक के नीचे रसूख और सांठगांठ का एक ऐसा खेल सामने आया है, (शासकीय अस्पताल मे प्राइवेट क्लिनिक) जिसने बिलासपुर जिला अस्पताल की साख को दांव पर लगा दिया है। नियमों और शासन के आदेशों को पूरी तरह दरकिनार करते हुए जिला अस्पताल परिसर के भीतर ‘त्रिवेणी सैटेलाइट डेंटल क्लीनिक’ नाम से एक निजी व्यावसायिक क्लीनिक का धड़ल्ले से संचालन किया जा रहा है।
साख दांव पर लगाकर निजी कॉलेज को फायदा पहुँचाने का आरोप (शासकीय अस्पताल मे प्राइवेट क्लिनिक)
अस्पताल के पास खुद का सर्वसुविधायुक्त डेंटल विभाग और योग्य सरकारी डॉक्टरों की टीम होने के बावजूद, भोले-भाले मरीजों को अच्छे और मुफ्त इलाज का झांसा देकर जाल में फंसाया जा रहा है। शुरुआती मुफ्त जांच के बाद असली खेल तब शुरू होता है, जब दांतों के बड़े और जटिल इलाज के नाम पर इन मरीजों को त्रिवेणी डेंटल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। इस पूरे मामले ने सरकारी अस्पताल परिसर में निजी संस्थाओं की अवैध पैठ और मरीजों के साथ होने वाले संगठित फर्जीवाड़े को उजागर कर दिया है….
प्रशिक्षण की आड़ में गड़बड़ी
इस पूरे खेल का सबसे गंभीर पहलू यह है कि इस निजी क्लीनिक को खोलने के लिए नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं। त्रिवेणी डेंटल कॉलेज प्रबंधन और जिला अस्पताल के बीच ऐसा कोई लिखित समझौता या अनुबंध (MOU) नहीं हुआ है, जो उन्हें सरकारी परिसर में क्लीनिक चलाने की अनुमति देता हो।
शासन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। अस्पताल के ही कई कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रशिक्षण की आड़ में यहां पूरी तरह से गड़बड़ी चल रही है और सरकारी अस्पताल की विश्वसनीयता का इस्तेमाल कर निजी कॉलेज के लिए ‘कस्टमर बेस’ तैयार किया जा रहा है। इस अनैतिक और अवैध संचालन से जिला अस्पताल का स्टाफ भी बेहद नाखुश है और वे इसे रोकने के लिए कड़े प्रशासनिक कदमों की मांग कर रहे हैं….
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस विवादित क्लीनिक की शुरुआत जिला अस्पताल के पूर्व सिविल सर्जन डॉ. अनिल गुप्ता के कार्यकाल में हुई थी, जो इसी वर्ष अप्रैल में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके जाने के बाद भी यह अवैध दुकान बेखौफ चल रही है…..





