पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार के बड़े फैसले, जाति प्रमाण पत्रों की जांच से लेकर सरकारी नौकरियों तक बदलाव

पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कई बड़े फैसलों का ऐलान किया है। नई सरकार ने जाति प्रमाण पत्रों की जांच, सरकारी नौकरियों की उम्र सीमा बढ़ाने, नेताओं की सुरक्षा में कटौती और पुलिस सुधार जैसे कई अहम कदम उठाए हैं।
सरकार ने 2011 के बाद जारी किए गए सभी जाति प्रमाण पत्रों की दोबारा जांच कराने का फैसला लिया है। जनजातीय विकास और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री क्षुदीराम टुडू ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान फर्जी एससी, एसटी और ओबीसी प्रमाण पत्र जारी किए गए थे, जिनकी अब जांच होगी। दोषी अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा भी बढ़ा दी गई है। नए नियमों के अनुसार ग्रुप ए पदों के लिए उम्र सीमा 41 वर्ष, ग्रुप बी के लिए 44 वर्ष और ग्रुप सी व डी के लिए 45 वर्ष कर दी गई है। यह फैसला 11 मई से लागू हो चुका है।
सरकार ने तृणमूल कांग्रेस नेताओं की सुरक्षा में भी कटौती की है। अभिषेक बनर्जी की ‘जेड प्लस’ सुरक्षा और विशेष पायलट कार सुविधा हटाई गई है। इसके अलावा कई अन्य टीएमसी नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था भी कम की गई है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस कल्याण बोर्ड को भी भंग करने का फैसला लिया है। उनका कहना है कि यह बोर्ड अपने मूल उद्देश्य से भटककर राजनीतिक संगठन जैसा बन गया था। सरकार अब तीन महीने के भीतर पुलिस सुधारों के लिए नया ढांचा तैयार करेगी।
नई सरकार ने अवैध अतिक्रमण पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू करने का भी फैसला लिया है। इसका असर हावड़ा ब्रिज के आसपास के इलाकों में देखने को मिला है।
इसके अलावा ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना के तहत 1 जून से महिलाओं के बैंक खातों में 3000 रुपये भेजने की तैयारी की जा रही है। वहीं बकरीद से पहले खुले में कुर्बानी पर भी सख्त नियम लागू किए गए हैं।
भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए सरकार हर महीने जिलाधिकारियों और विधायकों की संयुक्त बैठक भी आयोजित करेगी।





