Et af de længst eksisterende offshore-navne er stadig Queenvegas selvom konkurrencen er blevet hård. I sammanställningar av nyare alternativ förekommer Slotser casino som ett av flera mindre kända varumärken. Bland mindre etablerade sajter återfinns Newlucky casino som har en relativt enkel webbplats men ett brett spelutbud. För dem som vill veta mer om sajter utan begränsningar kan man klicka här och bläddra bland alternativen. Among lion-themed brand entries is www.leoncasino.nu which sits alongside several similar names. För spelare som är nyfikna på bonus buy-mekaniken kan man läs mer här för en bredare överblick.

‘No Gold’ Appeal: पीएम की ‘नो गोल्ड’ अपील पर घमासान: राष्ट्रहित का सुरक्षा कवच या परंपराओं पर सीधा प्रहार

इमरजेंसी लिक्विड मनी' पर छिड़ी जंग, सियासत से सर्राफा बाजार तक उबाल

देश में शादियों का सीजन हो और सोने की बात न हो, ऐसा तो मुमकिन नहीं। (‘No Gold’ Appeal) लेकिन देश के मुखिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसी अपील कर दी है, जिसने सर्राफा बाजार से लेकर आम आदमी के बेडरूम तक खलबली मचा दी है। प्रधानमंत्री ने देश के नागरिकों से आह्वान किया है कि देशहित और आर्थिक संतुलन के लिए कम से कम ‘एक साल तक सोना न खरीदें’।

पीएम की दलील है कि सोने के आसमान छूते दामों से बेटियों की शादी करने वाले परिवारों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है।अब साहेब, अपील तो हो गई, लेकिन इस पर देश की जनता और व्यापारियों का पारा भी ‘सोने’ की तरह तप गया है। कोई इसे देश की ‘आर्थिक ऊर्जा’ बचाने का मास्टरस्ट्रोक बता रहा है, तो कोई इसे सीधे भारतीय संस्कृति और तिजोरी की सुरक्षा पर चोट कह रहा है। विपक्ष पूछ रहा है कि जिन्हें परिवार का तजुर्बा नहीं, वो ‘मंगलसूत्र’ की कीमत क्या जानें? तो व्यापारी परेशान हैं कि अगर तिजोरियां बंद रहीं, तो धंधा कैसे चलेगा?

सोने न खरीदने की अपील पर क्रिया –प्रतिक्रिया  (‘No Gold’ Appeal) 

प्रधानमंत्री की इस अपील पर सर्राफा एसोसिएशन के अमित सराफ ने व्यापार और परंपरा दोनों का पक्ष बेहद मजबूती से सामने रखा है। अमित सराफ ने कहा कि प्रधानमंत्री का हर फैसला देशहित में होता है और वे इसका स्वागत करते हैं, लेकिन भारतीय समाज को समझना भी जरूरी है। भारत में सोना सिर्फ दिखावे का खिलौना नहीं, बल्कि ‘लिक्विड मनी’ यानी संकट के समय का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।

सुख हो या दुख, या फिर कोई अचानक आई विपदा, घर में रखा सोना ही सबसे पहले काम आता है। अमित सराफ ने एक व्यापारी के नजरिए से बड़ी चिंता जताते हुए चेतावनी दी कि अगर लोग एक साल तक सोना खरीदना पूरी तरह बंद कर देंगे, तो देश का सर्राफा व्यापार और इस उद्योग से जुड़े लाखों लोग भुखमरी की कगार पर आ जाएंगे। नागरिक इसे महज धातु नहीं, बल्कि एक अटूट और भरोसेमंद निवेश मानते हैं…….

इस पूरे मामले पर अनिल तिवारी ने एक गहरा और ऐतिहासिक विश्लेषण सामने रखा है। उन्होंने सोने को सदियों से चला आ रहा ‘विश्वास और अटूट भरोसे’ का प्रतीक बताया। सोने की ताकत को समझाने के लिए उन्होंने साल 1970 का उदाहरण दिया, जब सोने की कीमत मात्र ₹185 प्रति 10 ग्राम थी, जो आज बढ़कर ₹1,66,000 के पार पहुँच चुकी है। तिवारी का मानना है कि हिंदू समाज में जन्म से लेकर शादी-ब्याह तक, सोने का आदान-प्रदान एक अनिवार्य परंपरा है।

हालांकि, वे पीएम की इस चिंता से सहमत दिखे कि महंगे सोने से गरीब परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए अनिल तिवारी ने एक बेहद अनूठा और क्रांतिकारी सुझाव दिया—उन्होंने कहा कि यदि सरकार ‘रोल्ड गोल्ड’ या आर्टिफिशियल ज्वेलरी को सामाजिक मान्यता दिलाने का प्रयास करे, तो सोने पर से निर्भरता कम हो सकती है। उन्होंने उन भारतीय महिलाओं की भी तारीफ की, जिनके पास दुनिया का लगभग 10% सोना सुरक्षित है, जिसने देश की अर्थव्यवस्था को बचाए रखा……

दूसरी तरफ, समाज का एक बड़ा तबका इस अपील को ‘कड़वी दवा’ की तरह देख रहा है। सर्राफा व्यापारी अभिषेक शर्मा ने प्रधानमंत्री के इस कदम को पूरी तरह व्यावहारिक और राष्ट्रहित में बताया है। उनका कहना है कि सोने के दाम इतने बढ़ चुके हैं कि मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी वित्तीय संकट मंडरा रहा है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों को अत्यधिक कर्ज के जाल से बचाने के लिए ही यह अपील की है, इसलिए एक जिम्मेदार नागरिक के नाते हमें एक साल के लिए इस होड़ से बचना चाहिए।

इसी सुर में सुर मिलाते हुए आशीष बाजपेई ने भी पीएम की अपील का पूर्ण समर्थन किया। आशीष का कहना है कि आज एक गरीब या मध्यमवर्गीय परिवार को बेटी की शादी के लिए सोना खरीदने के चक्कर में अपनी जमीन तक बेचनी पड़ जाती है या फिर कर्ज के दलदल में डूबना पड़ता है। देश को मजबूत करने और इस आर्थिक दबाव से बचने के लिए सभी को एकजुट होकर एक साल तक सोना खरीदने से परहेज करना ही चाहिए…….

लेकिन यह मामला सिर्फ आर्थिक नहीं रहा, इस पर अब तीखी सियासत भी शुरू हो गई है। महिला कांग्रेस की प्रदेश महासचिव शिल्पी तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद तीखा हमला बोलते हुए उन्हें सीधे ‘महिला विरोधी’ करार दे दिया है। शिल्पी तिवारी ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को भारतीय संस्कृति में सोने और मंगलसूत्र के पवित्र महत्व का कोई अंदाजा नहीं है, क्योंकि उन्होंने स्वयं अपनी पत्नी का त्याग किया है।

उन्होंने साफ किया कि सोना कोई संपत्ति नहीं, बल्कि एक पवित्र धातु है जिसकी हमारे यहाँ पूजा की जाती है। शिल्पी ने कहा कि देश में महंगाई पहले ही सातवें आसमान पर है और ऊपर से शादी-ब्याह, बेटी की विदाई और बहू के स्वागत जैसी अनिवार्य रस्मों के लिए सोना आज भी बेहद जरूरी है। उन्होंने सीधे व्यक्तिगत हमला करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति का अपना कोई परिवार, बेटा-बेटी या बहू नहीं है, वह सोने के इस सांस्कृतिक और पारिवारिक दर्द को कभी नहीं समझ सकता…….

अपील के विरोध में निरुपमा बाजपेई ने भी इसे पूरी तरह बेमानी करार दिया। उनका तर्क है कि जमीन में हमेशा विवाद का डर रहता है और बैंकों में मनमुताबिक ब्याज नहीं मिलता, ऐसे में सोना ही आज भी सबसे सुरक्षित और मुनाफे का सौदा है। उन्होंने सरकार को नसीहत दे डाली कि जनता की बचत पर रोक लगाने के बजाय सरकार को नेताओं और अधिकारियों के वेतन-भत्तों और फिजूलखर्चों में कटौती करनी चाहिए।

दूसरी ओर, जमीनी हकीकत को स्वीकार करते हुए सर्राफा कारोबारी जुगल किशोर ने गोल्ड-सिल्वर पर बढ़ाई गई इंपोर्ट ड्यूटी और पीएम की अपील का स्वागत किया है। उन्होंने माना कि छोटे और ग्रामीण स्तर के व्यापारियों को इससे तकलीफ जरूर होगी, लेकिन वैश्विक युद्ध की परिस्थितियों को देखते हुए विदेशी मुद्रा भंडार की बचत और देश की आर्थिक ऊर्जा को सुरक्षित रखने के लिए यह कड़ा कदम बिल्कुल सही है। देशहित के लिए व्यापारी भाई इस तकलीफ को सहने के लिए तैयार हैं……अब देखना यह है कि प्रधानमंत्री की यह ‘गोल्डन अपील’ देश की तिजोरियों पर क्या असर डालती है.

Show More
Follow Us on Our Social Media
Back to top button
जम्मू-कश्मीर में बारिश से अपडेट सोनम ने ही राजा को दिया था खाई में धक्का… आरोपियों ने बताई सच्चाई
जम्मू-कश्मीर में बारिश से अपडेट सोनम ने ही राजा को दिया था खाई में धक्का… आरोपियों ने बताई सच्चाई