हाईकोर्ट फटकार: पांच साल से लंबित सड़क की बदहाली दूर करने वाली PIL, हाई कोर्ट ने सरकार और नगर निगम पर जताई नाराजगी
हाई कोर्ट की दोटूक—बिलासपुर में एक भी सड़क चलने लायक नहीं, 14 अक्टूबर को निगम आयुक्त देंगे जवाब

बिलासपुर में सड़कों की बदहाली को लेकर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम के कामकाज पर कड़ी नाराजगी जताई है। (हाईकोर्ट फटकार) मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा कि सड़क की स्थिति को लेकर पेश किए गए शपथपत्रों से हालात बेहद खराब नजर आ रहे हैं। वर्ष 2021 से जनहित याचिका लंबित होने के बावजूद सड़कों की स्थिति में अब तक कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है।
14 अक्टूबर को निगम आयुक्त देंगे जवाब (हाईकोर्ट फटकार)
खासकर बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की सड़कों की बदहाली पर कोर्ट ने चिंता जताई। सुनवाई के दौरान मोपका-सेंदरी बाईपास सड़क को लेकर भी हाई कोर्ट ने सवाल उठाए। एनएचएआई के शपथपत्र के अनुसार, यह सड़क अब तक प्राधिकरण को सौंपी नहीं गई है। सड़क फिलहाल लोक निर्माण विभाग के अधिकार क्षेत्र में है और रखरखाव की जिम्मेदारी भी उसी की है। इस स्थिति पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसा लगता है कि राज्य सरकार या तो परियोजना पूरी करने में रुचि नहीं ले रही है या फिर सड़क एनएचएआई को सौंपने के मूड में नहीं है। राज्य सरकार की ओर से लोक निर्माण विभाग के सचिव का शपथपत्र पेश करने के लिए समय मांगा गया है।
हाई कोर्ट ने एनएचएआई को बिलासपुर-रायपुर सड़क परियोजना पूरी होने की समय-सीमा स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए रायपुर और बिलासपुर के परियोजना अधिकारियों को शपथपत्र प्रस्तुत करना होगा। सुनवाई के दौरान न्याय मित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव ने बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की सड़कों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान में एक भी सड़क ऐसी नहीं है, जिसे ठीक से चलने योग्य कहा जा सके। उन्होंने पूजा पर्व से पहले सड़कों की मरम्मत नहीं होने पर दुर्घटनाओं और लोगों के घायल होने की आशंका जताई। साथ ही नगर निगम से तत्काल सड़कों को चलने लायक बनाने की मांग की।
हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की है। कोर्ट ने बिलासपुर नगर निगम आयुक्त को अपने क्षेत्र की सड़कों की मरम्मत के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी शपथपत्र के माध्यम से देने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान निगम की ओर से अधिवक्ता मौजूद नहीं थे। इस पर कोर्ट ने आयुक्त को अगली सुनवाई में स्वयं उपस्थित होने या निगम की ओर से उचित प्रतिनिधि भेजने का निर्देश दिया। ऐसा नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।





