जिसका खेत, उसकी रेत नीति को मिली हरी झंडी, बाढ़ प्रभावित किसानों को बड़ी राहत

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में मंत्रिमंडल ने जिसका खेत, उसकी रेत नीति को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत बाढ़ से प्रभावित किसानों को इस साल 31 दिसंबर तक अपनी जमीन से बिना किसी परमिट के रेत निकालने और इसे बेचने की अनुमति होगी। यह फैसला किसानों के हित में ऐतिहासिक माना जा रहा है और बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
बाढ़ के कारण खेतों में जमा हुई रेत और मिट्टी को निकालने के लिए संबंधित जिले के डिप्टी कमिश्नर प्रभावित गांवों की सूची तैयार करेंगे। जिला और उप-मंडल स्तर की निगरानी समितियां इस कार्य में सहयोग करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि मिट्टी और रेत निकालते समय जमीन की मूल सतह को नुकसान न पहुंचे। इस नीति के तहत मिट्टी/रेत/नदी के माध्यम से जमा सामग्री को खनन सामग्री नहीं माना जाएगा।
मंत्रिमंडल ने किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रति एकड़ 20,000 रुपये का मुआवजा देने का भी निर्णय लिया, जो अब तक का सबसे अधिक मुआवजा माना जा रहा है। इस कदम से गंभीर संकट में फंसे किसानों को तत्काल राहत मिल सकेगी।
साथ ही, मंत्रिमंडल ने पंजाब टाउन इम्प्रूवमेंट एक्ट, 1922 में संशोधन को मंजूरी दी, जिससे शहरी स्थानीय इकाइयों को इम्प्रूवमेंट ट्रस्टों के फंडों का उपयोग कर बुनियादी ढांचे के कार्यों को बढ़ावा देने में सक्षम बनाया जा सके। इस संशोधन के तहत जमीन, इमारतों या अन्य संपत्तियों से प्राप्त राशि म्यूनिसिपल डेवलपमेंट फंड में स्थानांतरित होगी।
सरकार ने राज्य में खनिज संसाधनों के नियोजित विकास और निगरानी के लिए पंजाब स्टेट मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट (SMET) के गठन की भी सहमति दी। इसके अलावा शिक्षा विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया सुधारने और लगभग 1500 शिक्षकों को नए अवसर देने के लिए पंजाब एजुकेशन सर्विस रूल्स-2018 में संशोधन किया गया।
मंत्रिमंडल ने कम्युनिटी सर्विस गाइडलाइंस-2025 को मंजूरी दी, जिससे पंजाब, हरियाणा और यू.टी. चंडीगढ़ की जिला अदालतों में एकरूपता लाई जा सके। पुलिस विभाग में एन.डी.पी.एस. और अन्य अपराधों से निपटने के लिए 1600 नई एन.जी.ओ. पदों का सृजन किया गया।
इस नीति और सरकारी फैसलों से बाढ़ प्रभावित किसानों को तत्काल राहत के साथ-साथ लंबी अवधि में कृषि योग्य भूमि की सुरक्षा और सामाजिक न्याय सुनिश्चित होगा। पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कदम किसानों के हित और प्रदेश के विकास को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से लिया गया है।





