Uncertainties: धान खरीदी में हाहाकार,17 दिन बाद भी अनियमितताएं चरम पर.

Uncertainties: सिर्फ 800 क्विंटल खरीद,किसान परेशान, केंद्रों में अफरा-तफरी....

प्रदेश में धान खरीदी शुरू हुए आज 17 दिन हो चुके हैं, लेकिन हालात सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। (Uncertainties) कई खरीदी केंद्रों में भारी अनियमितताएं सामने आ रही हैं, जिनका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। सबसे बड़ी दो समस्याएं एग्री स्टेट पोर्टल में रजिस्ट्रेशन का निरंक बताया जाना, और दूसरी, प्रतिदिन सिर्फ 800 क्विंटल धान खरीद की सीमा, जिसने किसानों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है।

प्रभारी का दावा-सरकार का आदेश, Uncertainties

इस बार धान खरीदी केंद्रों पर जो स्थिति बनी हुई है, वह पिछले वर्षों से बिलकुल उलट है। पिछले साल एक केंद्र में 2000 क्विंटल तक धान खरीदा जाता था, लेकिन इस साल यह क्षमता घटकर सिर्फ 800 क्विंटल प्रति दिन रह गई है। नतीजा किसानों की लंबी लाइनें, टोकन का संकट और खरीदी की रफ्तार बेहद धीमी।स्थानीय किसानों का आरोप है कि केंद्र प्रभारी खुद भी खरीदी कम करने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि धान का उठाव समय पर नहीं हो रहा और गोदाम भरते जा रहे हैं।

सिर्फ 800 क्विंटल खरीद,किसान परेशान, केंद्रों में अफरा-तफरी, (Uncertainties)

कई किसानों को पहले एक टोकन में काम हो जाता था, लेकिन अब उन्हें दो-दो टोकन कटवाने पड़ रहे हैं, जिससे समय और पैसा दोनों गंवाना पड़ रहा है।जब इस बारे में खरीदी केंद्र के प्रभारी से पूछा गया, तो उन्होंने साफ कहा कि सरकार से 800 क्विंटल प्रतिदिन खरीद का आदेश आया है, वे उसी के अनुसार काम कर रहे हैं।लेकिन किसानों की दलील है कि यह आदेश खेती सीजन के हिसाब से बेहद कम है और इससे खरीदी की गति रुक गई है।

17 दिन बाद भी अनियमितताएं चरम पर.

अब बड़ा सवाल यह है।क्या धान खरीदी प्रभारी उठाव न होने की वजह से जानबूझकर खरीदी कम कर रहे हैं?या फिर आदेशों की आड़ में किसानों की समस्याओं को अनदेखा किया जा रहा है?फिलहाल, सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वो कब हस्तक्षेप कर स्थिति को सामान्य करेगा।

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