तीन दिवसीय महाशिवरात्रि मेले की हुई शुरुआत, वर्षों से हो रहा आयोजन

बिलासपुर: बिलासपुर में महाशिवरात्रि के पर्व पर शहर भर में श्रद्धा-उत्साह का माहौल नजर आया। इस बार महाशिवरात्रि का पर्व विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन सूर्य, चंद्रमा और शनि का त्रिग्रही योग बन रहा है, जो सफलता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।इसके अलावा, शिव योग और सिद्ध योग भी बन रहे हैं, जो पूजा-अर्चना से मनोकामनाओं की पूर्ति का कारण बनते हैं।अमृत सिद्धि योग भी इस दिन के व्रत और अनुष्ठानों के फल को कई गुना बढ़ा देगा। लिहाजा चांटीडीह के प्रसिद्ध शिव मंदिर में भी सुबह से ही भक्त भोलेनाथ की पूजा अर्चना करने पहुंचते रहे महिलाओं और पुरुषकी लंबी कतारें का यह दौर दोपहर तक देखा गया हाथों में जल और पूजन सामग्री लिए भक्ति भोलेनाथ की आराधना के लिए आतुर नजर आए तो मंदिर प्रबंधन समिति के द्वारा भी व्यवस्था बनाने के लिए पूरा प्रयास किया गया इस मौके पर भक्तों ने महाशिवरात्रि के महत्व को भी बताया
चांटीडीह शिव मंदिर परिसर में महाशिवरात्रि के दिन एक विशेष मेला आयोजित होता । जहां बिलासपुर के अलावा बाहर प्रदेशों से भी छोटे व्यापारी यहां व्यापार करने आए हैं। मेले के आयोजकों ने बताया कि चांटीडीह में 1932 से मेला आयोजित किया जा रहा है, और इस साल भी मंदिर परिसर में चारों धाम की मूर्तियों के दर्शन के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की झलक देखने को मिल रही है।मेला क्षेत्र में महिला और पुरुष पुलिस बल की तैनाती की जाएगी, ताकि सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा सके।
चांटीडीह किया मेला बिलासपुर आंचल में काफी प्रसिद्ध है महाशिवरात्रि के अवसर पर तीन दिवसीय से मेले में आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से भी लोग पहुंचते हैं और पूजन के साथ मेले का आनंद उठाते हैं महाशिवरात्रि के पहले दिन यहां जहां लोग पूजा अर्चना करने पहुंचे तो वहीं इस बार यहां भव्य झूले भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं इसके अलावा पारंपरिक खिलौने के साथ छत्तीसगढ़ी व्यंजन भी मेले में पहुंचने वाले लोगों को एक सुखद अनुभव का एहसास कर रहे हैं हालांकि स्थान छोटे होने की वजह से मेले का स्वरूप छोटा नजर आ रहा है लेकिन श्रद्धा और उमंग के साथ लोगों का उत्साह मिले की सफलता को दर्शा रहा है





