बिलासपुर में आवारा श्वानों का आतंक, निगम प्रशासन से सख्त कार्ययोजना की मांग

बिलासपुर। न्यायधानी में लगातार आवारा श्वानों द्वारा लोगों को काटने की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। गली–मोहल्लों में झुंड बनाकर घूम रहे ये श्वान अचानक किसी पर भी हमला कर देते हैं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है। लेकिन नगर निगम प्रशासन की लापरवाही के कारण समस्या और गंभीर होती जा रही है।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और नगर निगम को आदेश दिया है कि आवारा श्वानों को पकड़कर श्वान आश्रय स्थल में रखा जाए और वहाँ सीसीटीवी कैमरे से निगरानी की जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि बिलासपुर नगर निगम को भी इसी तरह की ठोस कार्ययोजना बनानी चाहिए।

स्थानीय लोगों की मांग है कि शहर में “श्वान आश्रय स्थल घर” बनाए जाएँ, हर वार्ड में श्वान पकड़ने के लिए वाहन की व्यवस्था हो और पकड़े गए कुत्तों की नसबंदी कर उन्हें शहर से दूर छोड़ा जाए। साथ ही, श्वान काटने के मामलों में पीड़ितों को तत्काल रेबीज़ इंजेक्शन मिले और निगम प्रशासन व डॉक्टरों की संयुक्त टीम घर–घर जाकर लोगों को जागरूक करे।

लोगों का यह भी कहना है कि नगर निगम को आवारा श्वानों की शिकायत के लिए टोल–फ्री हेल्पलाइन जारी करनी चाहिए, ताकि तुरंत कार्रवाई हो सके। वहीं, पालतू श्वानों के लिए मालिकों को गले में पट्टा लगाना अनिवार्य किया जाए और नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना व एफआईआर दर्ज की जाए।

शहरवासियों का कहना है कि समय रहते यदि निगम प्रशासन ने कदम नहीं उठाए तो यह समस्या और भयावह हो सकती है।

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