Question On The Quality Of Batasha: दीपावली की पूजा के लिए तैयार होने वाले बताशे की क्वालिटी पर प्रश्न चिन्ह
Question On The Quality Of Batasha: प्रसाद के रूप में आस्था से खिलवाड़

दीपावली पर पूजा के थाल मे माता लक्ष्मी को चढ़ने वाले बताशे, जिन्हें हम श्रद्धा से ग्रहण करते हैं, वही बताशे कैसे बन रहे हैं, ये तस्वीरें देखकर शायद आपका मुंह मीठा होने से पहले कड़वा हो जाए। (Question On The Quality Of Batasha) हजारों क्विंटल बताशे लाखों की सेहत पर अनगिनत सवाल खड़े कर रहे है।
जांच पड़ताल की कमी,Question On The Quality Of Batasha
दीपावली पर्व में खूब डिमांड होने वाले बताशे को बनाने का काम बीते दिनों पूरे जोश से चला। लेकिन इन तस्वीरों में जो दिखाई दे रहा है, वो श्रद्धा नहीं, लापरवाही की हद है। जिस शीट पर उबलती चाशनी गिराई जाती है, उसी पर कारीगर चप्पल पहनकर काम कर रहे हैं। बन रहे ये बताशे देवी मां लक्ष्मी के चरणों में चढ़ाए जाएंगे, और फिर लोगों के घरों में प्रसाद बनकर पहुंचेंगे। इसको तैयार करने के दौरान यहां सफाई का ख्याल नहीं रखा जाता। चाशनी में डाला जाने वाला सोडा नंगे हाथों से घोला जा रहा है। चाशनी उबालने के लिए इस्तेमाल हो रहे ड्रम गंदगी से भरे हुए हैं। ना कोई साफ कपड़ा, ना ढकने की व्यवस्था, सब कुछ खुला और लापरवाह ढंग से किया जा रहा है। बताशे घरों के बाहर ही तैयार हो रहे हैं।
बताशे की क्वालिटी गिरती जा रही है
घर से लगी सड़क पर जगह-जगह गोबर बिखरा है, और उसी के पास बैठकर तैयार हो रहा है प्रसाद। मक्खियाँ पहले गोबर पर, फिर सीधे चाशनी पर उतर रही हैं। (Question On The Quality Of Batasha)और यही मिठास दीपावली की पूजा में पहुंचने वाली है। प्रश्न श्रद्धा के साथ सेहत का भी है। ऐसे अस्वच्छ माहौल में बने बताशे लोगों के स्वास्थ्य पर क्या असर डालेंगे, इस पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल हैं। दीपावली से पहले इन दुकानों की ना जांच की जाती है, ना बताशों का सैंपल्स लिया गया है। हर साल की तरह इस बार भी त्योहारी मांग बढ़ने के साथ बताशे की क्वालिटी गिरती जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक खामोश है। श्रद्धा और परंपरा का ये प्रतीक जब लापरवाही की भेंट चढ़ जाए, तो सवाल उठना जरूरी है। कि क्या हम वाकई प्रसाद खा रहे हैं, या फिर लापरवाही का स्वाद?





