बस्तर में सरेंडर नक्सलियों को संगठन ने बताया गद्दार, रूपेश ने जताई अपनी सफाई

बस्तर: केंद्रीय कमेटी के सदस्य रूपेश समेत 210 नक्सलियों के हालिया सरेंडर के बाद माओवाद संगठन में खलबली मची हुई है। संगठन ने नक्सली अभय के नाम से जारी पर्चे में सरेंडर किए गए नक्सलियों को गद्दार बताया। इसके जवाब में सरेंडर नक्सली रूपेश ने स्पष्ट किया कि हथियार डालने का फैसला केवल उनका नहीं, बल्कि महासचिव बसवा राजू का भी था। उन्होंने कहा कि यह कदम भविष्य को सुरक्षित बनाने और साथियों की भलाई के लिए उठाया गया।
रूपेश ने एक वीडियो संदेश जारी कर बताया कि अप्रैल 2025 में सरकार के साथ शांति वार्ता को लेकर पहला प्रेस नोट उन्होंने और बसवा राजू ने जारी किया था। इस दौरान बसवा राजू चाहते थे कि सशस्त्र संघर्ष विराम पाए और सरकार से सीधे बातचीत की जाए। उनके अनुसार, बसवा राजू का एनकाउंटर होने से पहले ही उन्होंने सभी केंद्रीय कमेटी मेंबर्स को लेटर भेजकर यह निर्णय साझा किया था।
सरेंडर प्रक्रिया के दौरान 153 हथियार भी सौंपे गए। रूपेश ने कहा कि हमने अपने किसी साथी पर दबाव डालकर सरेंडर नहीं करवाया। संगठन द्वारा लगाए जा रहे आरोप, कि उन्होंने पार्टी को नुकसान पहुंचाया, पूरी तरह गलत हैं। उनका कहना था कि हम केवल पार्टी और अपने साथियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरेंडर करने के लिए बाध्य हुए।
रूपेश ने यह भी कहा कि दंडकारण्य में हुई बैठकों और उत्तर बस्तर में होने वाली गतिविधियों की जानकारी उन्हें छिपाई गई। इसके बावजूद उन्होंने अपने पत्राचार और लेटर सभी केंद्रीय कमेटी मेंबर्स तक पहुंचाए। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनके फैसले से संगठन या उसके किसी सदस्य के खिलाफ कोई गलत निर्णय नहीं लिया गया।
सरेंडर के बाद छत्तीसगढ़ के DGP अरुण देव गौतम और अन्य पुलिस अधिकारियों ने नक्सलियों का स्वागत संविधान की किताब और गुलाब भेंट करके किया। रूपेश ने स्पेशल जोनल कमेटी की समीक्षा बैठक का जिक्र करते हुए बताया कि उनके फैसले को लेकर पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सभी संबंधित सदस्यों से विचार विमर्श के बाद हुई।
रूपेश का कहना है कि अब उन्हें गद्दार बताना और नुकसान का जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने माओवाद संगठन से सवाल उठाए और यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल सही मार्ग पर लौटना और अपने भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
सरेंडर किए गए नक्सलियों की संख्या में महिला नक्सली भी पुरुषों से अधिक शामिल थीं। यह सरेंडर बस्तर और कांकेर क्षेत्र में पुलिस के सहयोग से किया गया।





