Myanmar Border: म्यांमार सीमा पर कंटीले तार लगाने का विरोध, 3 राज्यों में काम शुरू नहीं

दिल्ली। पूर्वोत्तर के चार राज्यों में म्यांमार से लगी सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ लगाने का प्रोजेक्ट विवादों में है। म्यांमार से सटी 1,643 किमी लंबी सीमा पर यह प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही तीन राज्यों में विरोध हो रहा है। इसके चलते इन राज्यों में काम शुरू नहीं हो पाया है, जबकि मणिपुर में केवल 37 किमी बाड़ ही लगाई जा सकी है। नगालैंड और मिजोरम में स्थानीय संगठन इस प्रोजेक्ट का खुलकर विरोध कर रहे हैं। नगालैंड के सबसे बड़े संगठन यूनाइटेड नगा काउंसिल (UNC) ने स्थानीय लोगों को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने इस प्रोजेक्ट में काम किया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
प्रोजेक्ट की लागत और विस्तार
इस प्रोजेक्ट पर 31 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसमें से 20 हजार करोड़ रुपये बाड़ लगाने और बाकी का हिस्सा सड़क निर्माण पर खर्च होगा। चार राज्यों में 1,500 किमी लंबी सीमा पर बाड़ और सड़क का निर्माण करना है। मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश इन चार राज्यों में बाड़ लगाई जाएगी।
मिजोरम और मणिपुर में विरोध
मिजोरम और मणिपुर में यह प्रोजेक्ट पहले ही विरोध का सामना कर रहा था। मिजो जिरलाई पाल (MZP) के महासचिव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपील की है कि वे बाड़ लगाने के फैसले पर पुनर्विचार करें। उनका कहना है कि बाड़ की वजह से उनके ऐतिहासिक और पुश्तैनी स्थल प्रभावित होंगे।
नगालैंड में बंटवारे का डर
नगालैंड के नेताओं का कहना है कि बाड़ लगाने से उनकी जमीन पर कब्जा किया जाएगा और यह उनके ऐतिहासिक अधिकारों का उल्लंघन होगा। नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के महासचिव एस. कासूंग ने कहा कि बाड़ लगाने से नगाओं को बांटने की कोशिश की जा रही है, जो वे कभी नहीं होने देंगे। आपको बता दे, कि म्यांमार से घुसपैठ रोकने के लिए यह बाड़ परियोजना शुरू की गई है, लेकिन स्थानीय संगठनों और नेताओं का विरोध इसे और कठिन बना रहा है। सरकार को इस मामले में स्थानीय भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाने की आवश्यकता होगी।





