बस्तर में माओवादियों का आत्मसमर्पण, भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार की तारीफ की

छत्तीसगढ़ के बस्तर में शुक्रवार को 208 माओवादियों ने भारतीय संविधान की प्रति लेकर आत्मसमर्पण किया। इसमें 110 महिलाएं और 98 पुरुष शामिल थे, जो प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के विभिन्न स्तरों पर सक्रिय थे। इस घटना पर राजनीतिक हलचल मची हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर राज्य की भाजपा सरकार और सुरक्षा बलों की तारीफ की और कहा कि यह मुख्यधारा में लौटने का परिणाम ‘विश्वास-विकास-सुरक्षा’ नीति की सफलता है।

भूपेश बघेल ने एक्स पर लिखा कि राज्य और केंद्रीय गृह मंत्री ने पहले की तरह उनकी नीति को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि यह आत्मसमर्पण इस राष्ट्रीय लड़ाई के अंत की दिशा में सकारात्मक कदम है। साथ ही उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले के डेढ़ दशक में भाजपा माओवाद के खिलाफ इच्छाशक्ति नहीं दिखा पाई।

इस पर भाजपा के वन मंत्री केदार कश्यप ने भूपेश बघेल को धन्यवाद कहा, लेकिन सवाल उठाया कि यह उनकी निजी राय है या कांग्रेस का आधिकारिक बयान। कश्यप ने कांग्रेस पर जनजाति विरोधी और माओवादी समर्थक नीति अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पूर्व में कांग्रेस नेताओं ने सलवा जुडूम और माओवाद विरोधी कार्रवाइयों में सहयोग नहीं दिया और दोहरी राजनीति की।

भूपेश बघेल ने इसके बाद भी अपनी प्रतिक्रिया जारी रखी। उन्होंने कहा कि बस्तर को खुशहाल बनाने की दिशा में काम कांग्रेस सरकार ने शुरू किया था और इसे आगे भी जारी रखेगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि माओवादी हिंसा को राजनीतिक हथियार नहीं बनने देंगे। बघेल ने कहा कि माओवाद कमजोर हो रहा है, फिर भी भाजपा कांग्रेस पर झूठे आरोप लगाकर राजनीति कर रही है।

भूपेश ने यह भी याद दिलाया कि माओवाद और आतंकवाद की सबसे बड़ी कीमत कांग्रेस ने चुकाई है। उनके नेताओं ने माओवादी हमलों में बलिदान दिया, लेकिन उस हमले की जांच को भाजपा ने बार-बार रोका। उन्होंने कहा कि बस्तर ने जो पीड़ा झेली है, उसकी जिम्मेदारी 15 साल की भाजपा सरकार पर है।

इस आत्मसमर्पण ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। भूपेश बघेल और भाजपा के अधिकारियों के बीच बयानबाजी जारी है। घटनाक्रम ने माओवाद उन्मूलन नीति, सुरक्षा और क्षेत्रीय राजनीति पर बहस को बढ़ावा दिया है।

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