कपिल सिब्बल ने न्यायपालिका पर उठाए सवाल, जनता के विश्वास में गिरावट पर जताई चिंता

राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने देश की न्यायिक प्रणाली को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में जनता का विश्वास लगातार कम होता जा रहा है। सिब्बल ने यह भी कहा कि सरकार और न्यायपालिका को यह स्वीकार करना चाहिए कि मौजूदा न्यायिक प्रणाली और जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया अब कारगर नहीं रही है।
भ्रष्टाचार और न्यायिक निष्क्रियता पर तीखी आलोचना
एक इंटरव्यू में सिब्बल ने न्यायिक निष्क्रियता और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जिला और सत्र न्यायालयों में अधिकतर मामलों में जमानत के आवेदन खारिज कर दिए जाते हैं, जो इस सिस्टम की गहरी खामियों को उजागर करता है। उन्होंने उच्च न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने के लिए किसी प्रभावी तंत्र की कमी को भी लेकर चिंता जताई।
सिब्बल ने कहा कि जजों के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया तो मौजूद है, लेकिन यह अक्सर अटक जाती है। इस कारण आम जनता के पास न्याय पाने का सही तरीका नहीं होता। उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज शेखर कुमार यादव के विवादास्पद बयानों का हवाला देते हुए कहा कि न्यायिक तंत्र में सुधार की जरूरत है।
न्यायाधीशों के बहुसंख्यकवादी रुख पर सवाल
सिब्बल ने न्यायाधीशों द्वारा बहुसंख्यकवादी दृष्टिकोण अपनाने और राजनीतिक रुख अपनाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ न्यायाधीश खुलेआम राजनीतिक विचारों का समर्थन कर रहे हैं और बाद में उस पार्टी में शामिल हो जाते हैं। सिब्बल ने उदाहरण के तौर पर एक न्यायाधीश का जिक्र किया, जिसने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह आरएसएस से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज शेखर कुमार यादव के उस बयान का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि “भारत में बहुसंख्यक संस्कृति कायम रहनी चाहिए और केवल एक हिंदू ही भारत को विश्वगुरु बना सकता है।” सिब्बल ने कहा कि इस तरह के बयानों से न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं और जनता का भरोसा कम होता जा रहा है।
संविधान और न्यायिक प्रणाली में सुधार की जरूरत
कपिल सिब्बल ने जोर देकर कहा कि न्यायिक प्रणाली में सुधार के लिए सरकार और न्यायपालिका दोनों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के विभिन्न रूप हैं और इसे जड़ से खत्म करने के लिए प्रभावी तंत्र की आवश्यकता है। सिब्बल ने यह भी कहा कि न्यायपालिका को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होना चाहिए ताकि जनता का उस पर विश्वास बना रहे।





