17 साल पुराने जातिगत अभद्रता मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सभी आरोपी बरी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लगभग 17 साल पुराने एक मामले में बड़ा निर्णय लेते हुए स्पेशल एट्रोसिटी कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने सभी ग्रामीणों को बरी कर दिया है।

यह मामला वर्ष 2006 का है। शिकायतकर्ता लखन लाल कुरें ने आरोप लगाया था कि ग्राम जोरातराई में एक बैठक के दौरान कुछ ग्रामीणों ने उनके साथ अभद्रता की, जातिसूचक गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी। इस आधार पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 294, 506, 323/34 तथा एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।

ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2008 में आरोपियों पर जुर्माना और अल्पावधि की सजा तय की थी। लेकिन हाईकोर्ट ने इस आदेश को खारिज कर दिया।

हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता के बयान में कई विरोधाभास मिले हैं और प्रस्तुत गवाहियों से आरोप साबित नहीं होते। जांच अधिकारी ने भी कई कमियों को स्वीकार किया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायत में बताए गए जातिगत शब्द आईपीसी की धारा 294 (अश्लीलता) के अंतर्गत नहीं आते।

इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। अदालत ने अपील स्वीकार करते हुए सभी को पूरी तरह बरी कर दिया और ट्रायल कोर्ट का फैसला निरस्त कर दिया।

Show More
Follow Us on Our Social Media
Back to top button