हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: युवती की मर्जी से बने संबंध, रेप नहीं बल्कि प्रेम संबंध माना गया

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बस्तर जिले में रेप के आरोप में 10 साल की सजा काट रहे CAF (छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स) के जवान रूपेश कुमार पुरी को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि यह मामला जबरन यौन शोषण का नहीं, बल्कि आपसी प्रेम और सहमति का था। युवती बालिग थी और उसने अपनी मर्जी से आरोपी के साथ संबंध बनाए थे।
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने फास्ट ट्रैक कोर्ट, बस्तर (जगदलपुर) के 21 फरवरी 2022 के फैसले को रद्द कर दिया। कोर्ट ने माना कि पीड़िता और आरोपी के बीच साल 2013 से प्रेम संबंध था और दोनों लंबे समय तक एक-दूसरे के संपर्क में रहे। युवती ने खुद फेसबुक पर आरोपी को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी, और कई बार उसके घर भी गई थी।
मामला साल 2020 का है, जब पीड़िता ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ संबंध बनाए और फिर उसे छोड़ दिया। पुलिस ने इस पर धारा 376(2)(एन) के तहत मामला दर्ज किया था। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी को 10 साल की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
आरोपी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उसके वकील ने कहा कि दोनों के बीच प्रेम संबंध थे और यह संबंध आपसी सहमति से बने थे। अगर शादी नहीं हो पाई, तो इसे झूठे वादे के तहत सहमति नहीं कहा जा सकता। वकील ने यह भी बताया कि आरोपी CAF में कार्यरत था और ड्यूटी पर रहने के कारण कुछ समय के लिए घर से दूर था। इस बीच दोनों परिवारों के बीच विवाद हुआ और परिजनों के दबाव में FIR दर्ज कराई गई।
हाईकोर्ट ने गवाहों और मेडिकल रिपोर्ट की जांच के बाद कहा कि दुष्कर्म के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं। अदालत ने यह भी माना कि पीड़िता ने खुद स्वीकार किया था कि यदि आरोपी के माता-पिता उसके साथ ठीक व्यवहार करते, तो वह शिकायत नहीं करती।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल शादी के वादे पर बने संबंध को दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि आरोपी की शुरुआत से ही शादी करने की मंशा नहीं थी। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए रूपेश कुमार पुरी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।





