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मध्य प्रदेश में जीएसटी ट्रिब्यूनल के नियम जारी, 30 जून 2026 तक दाखिल की जा सकेंगी अपीलें

मध्य प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल की स्थापना की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य में ट्रिब्यूनल की पीठ की स्थापना से पहले इसके नियम जारी कर दिए गए हैं। अब करदाताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि जीएसटी विवादों की अपीलें दाखिल करने की स्पष्ट समयसीमा तय कर दी गई है।

जारी नियमों के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 तक के सभी कर विवादों की अपील 30 जून 2026 तक दाखिल की जा सकेगी। इसके बाद सामान्य प्रक्रिया लागू होगी, जिसके तहत विभागीय आदेश के तीन माह के भीतर अपील दाखिल करनी होगी। अब तक ट्रिब्यूनल के अभाव में कर विवादों के मामलों में अपील लंबित थी, जिसे लेकर व्यापारी और कर सलाहकार संगठन लगातार मांग कर रहे थे।

राज्य स्तरीय कार्यशाला में प्रमुख वक्ता अमित दवे ने बताया कि ट्रिब्यूनल में सभी अपीलें इलेक्ट्रॉनिक फार्म में दाखिल की जाएंगी। मैन्युअल अपील के लिए विशेष अनुमति लेनी होगी और विभाग के आदेश की सत्यापित प्रति सात दिन के भीतर प्रस्तुत करनी होगी। अपील करते समय करदाता को विभाग द्वारा निर्धारित कर की राशि का एक तय प्रतिशत और निश्चित फीस जमा करनी होगी। मध्य प्रदेश के लिए अपीलों की सुनवाई भोपाल में होगी।

कार्यशाला में कर सलाहकार अंकुर अग्रवाल ने बताया कि इनवायस मैनेजमेंट सिस्टम में भी सुधार किए गए हैं। अब करदाता क्रेडिट नोट और डेबिट नोट को एक तिमाही तक लंबित रख सकेंगे। पहले यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी।

टैक्स लॉ बार एसोसिएशन और कमर्शियल टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि ट्रिब्यूनल शुरू होने के साथ ही उस पर करीब चार लाख अपीलों का बोझ पड़ने की संभावना है। चार्टर्ड अकाउंटेंट नवीन खंडेलवाल के अनुसार, ट्रिब्यूनल की स्थापना में आठ साल की देरी के कारण यह स्थिति बनी है।

उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को पुराने विवादों के निपटारे के लिए डिस्प्यूट रिजोल्यूशन स्कीम लागू करनी चाहिए, ताकि 20 या 30 प्रतिशत कर राशि जमा कर विवादों का निपटारा किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम करदाताओं और विभाग दोनों के लिए राहतदायक साबित होगा।

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