छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना घोटाले में पूर्व एसडीएम समेत पांच अधिकारी फरार, ईओडब्ल्यू और एसीबी कर रही तलाश

रायपुर: छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना घोटाले के मामले ने एक बार फिर बड़ा मोड़ ले लिया है। तीन पटवारियों की गिरफ्तारी के बाद अब अभनपुर के पूर्व एसडीएम निर्भय साहू, आरआई रोशनलाल वर्मा, तहसीलदार शशिकांत कुर्रे, नायब तहसीलदार लखेश्वर किरण और पटवारी जितेंद्र साहू फरार हो गए हैं। इन सभी की जमानत हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है, जिसके बाद आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीमें उनकी तलाश में जुटी हैं।
जानकारी के मुताबिक, भारतमाला परियोजना में भूमि अधिग्रहण मुआवजे के वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई थी। इस मामले में राज्य के 11 जिलों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अफसरों के नाम भी जांच के दायरे में आए हैं। सरकार की विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी है, जबकि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय अब इस प्रकरण को सीबीआई या ईडी को सौंपने पर विचार कर रहा है।
ईओडब्ल्यू की टीम ने हाल ही में आठ ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें तीन पटवारी – दिनेश पटेल, लेखराज देवांगन और बसंती धृतलहरे – को गिरफ्तार किया गया। बताया जा रहा है कि छापे की भनक लगते ही पांचों अधिकारी फरार हो गए।
जांच में यह खुलासा हुआ है कि कई जगहों पर एक ही जमीन को टुकड़ों में बांटकर फर्जी नामांतरण किए गए और गलत तरीके से मुआवजा लिया गया, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने भी इस मामले की जांच की पुष्टि की है।
वर्तमान में रायपुर, दुर्ग, धमतरी, कांकेर, कोरबा, रायगढ़, बिलासपुर और जांजगीर-चांपा सहित 11 जिलों में अनियमितताओं की जांच चल रही है। वहीं, विपक्ष ने इस घोटाले की सीबीआई जांच की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस मामले में प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है, जबकि सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से बातचीत की है।
अधिकारियों का अनुमान है कि यह भ्रष्टाचार करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है। फिलहाल ईओडब्ल्यू और एसीबी की संयुक्त टीम फरार अधिकारियों की संपत्ति कुर्क करने की तैयारी कर रही है।





