जैविक खेती से बदली किसान की किस्मत, 5 क्विंटल से बढ़कर 22 क्विंटल हुई पैदावार

कवर्धा क्षेत्र के एक किसान ने पारंपरिक खेती छोड़कर जैविक पद्धति अपनाई और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की है। 25 एकड़ जमीन पर किए गए इस प्रयोग से जहां पहले प्रति एकड़ 4-5 क्विंटल धान की पैदावार होती थी, वहीं अब यह बढ़कर 22 क्विंटल से अधिक हो गई है। कम लागत और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से खेती को लाभकारी बनाया गया है।

जैविक तरीकों से बढ़ी उपज और मिट्टी की गुणवत्ता
किसान ने रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग बंद कर जीवामृत और हरी खाद का सहारा लिया। 200 लीटर पानी में गुड़, बेसन और मिट्टी मिलाकर तैयार किए गए जीवामृत से खेत की उर्वरता बढ़ी और फसल को आवश्यक पोषण मिला। इससे न केवल उत्पादन बढ़ा, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ।

देशी उपायों से फसलों की सुरक्षा
फसलों को कीट और रोगों से बचाने के लिए नीम, बेशरम और धतूरा जैसी कड़वी पत्तियों का अर्क तैयार कर छिड़काव किया जाता है। फंगस से बचाव के लिए मट्ठे का उपयोग किया जाता है। इन उपायों से महंगे रासायनिक कीटनाशकों पर होने वाला खर्च पूरी तरह खत्म हो गया है।

दो फसल प्रणाली से बढ़ी आय
खेती में धान के बाद सब्जियों की खेती कर सालभर आय सुनिश्चित की जा रही है। फसलों के बीच अंतराल रखने और हरी खाद के उपयोग से जमीन की उर्वरता बनी रहती है। इस मॉडल से किसान की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और अन्य किसान भी इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

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