राजिम हिंसा के बाद परिवारों का पलायन, बच्चों की पढ़ाई पर संकट

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के दुतकैया गांव में 1 फरवरी को हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद कई परिवारों को गांव छोड़कर पलायन करना पड़ा। पीड़ितों के अनुसार, हमलावरों ने घरों में तोड़फोड़, आगजनी और मारपीट की घटनाओं को अंजाम दिया, जिससे गांव का माहौल भयावह हो गया।

घटना की शुरुआत दो पक्षों के युवकों के बीच हुए विवाद से हुई, जिसके बाद एक पक्ष द्वारा मंदिर में तोड़फोड़ किए जाने से तनाव बढ़ गया। इसके बाद बाहरी तत्वों के उकसावे से यह विवाद सांप्रदायिक हिंसा में बदल गया। हिंसा के दौरान एक समुदाय के करीब 10 से 11 घरों को आग के हवाले कर दिया गया।

पीड़ित परिवारों ने बताया कि हमलावरों ने धार्मिक ग्रंथों का अपमान किया और लोगों को जबरन नारे लगाने के लिए मजबूर किया। कई लोगों के साथ मारपीट की गई और घरों में लूटपाट भी हुई। डर के कारण परिवारों को रातों-रात गांव छोड़कर रायपुर में शरण लेनी पड़ी, जहां 8 से 10 परिवारों के लगभग 40 से 50 लोग, जिनमें 17 बच्चे शामिल हैं, अस्थायी रूप से रह रहे हैं।

बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो गई है। कई छात्र पिछले डेढ़ महीने से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और केवल परीक्षा देने के लिए ही स्कूल पहुंचे। उनका कहना है कि पढ़ाई का माहौल खत्म हो गया है और वे अपने पुराने जीवन में लौटना चाहते हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने पहले इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरे तोड़े, फिर घरों के दरवाजे तोड़कर अंदर घुस गए। लोगों पर चाकू और लोहे की रॉड से हमला किया गया। कुछ परिवारों ने एक कमरे में छिपकर अपनी जान बचाई, जहां धुएं और आग के बीच सांस लेना मुश्किल हो गया था।

पीड़ितों का आरोप है कि उन्होंने पुलिस से मदद मांगी, लेकिन समय पर सहायता नहीं मिली। देर रात फोर्स के पहुंचने के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया।

घटना में घायल लोगों का इलाज कराया गया, लेकिन पीड़ितों का कहना है कि अब तक उन्हें पर्याप्त प्रशासनिक सहायता नहीं मिली है। उनका यह भी आरोप है कि कुछ आरोपित अब भी खुलेआम घूम रहे हैं और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई है।

पीड़ित परिवारों ने मांग की है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाए, उनके नुकसान की भरपाई की जाए और गांव में सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि वे वापस अपने घर लौट सकें और सामान्य जीवन शुरू कर सकें।

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