नक्सल सरेंडर पर दीपक बैज का सवाल: क्या सरकार झीरम 2 की तैयारी में है?

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के बड़े पैमाने पर हो रहे आत्मसमर्पण पर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि नक्सलियों के लगातार सरेंडर के पीछे कहीं कोई “बड़ी साजिश” तो नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कहीं “झीरम-2” की तैयारी तो नहीं कर रही।

बैज ने कहा कि जब 210 नक्सलियों ने सरेंडर किया तो मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री मौके पर क्यों नहीं पहुंचे। उन्होंने पूछा कि आखिर नक्सलियों और सरकार के बीच क्या डील हुई है और सरेंडर करने वाले शीर्ष नक्सली नेता रूपेश को मीडिया के सामने क्यों नहीं लाया गया।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार केवल दिखावटी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही है जबकि ऑपरेशन पूरी तरह ठप कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि “जब मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम जगदलपुर में थे, तो वे सरेंडर स्थल पर क्यों नहीं गए? केवल औपचारिकता पूरी कर लौट आए।”

वहीं, डिप्टी सीएम अरुण साव ने पलटवार करते हुए कहा कि “कांग्रेस हमेशा देश तोड़ने वालों के साथ नजर आती है। नक्सलियों को पांच साल तक कांग्रेस ने पाला-पोसा है, अब नैतिकता की बात कर रही है।”

गौरतलब है कि 17 अक्टूबर को जगदलपुर में 210 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। उन्होंने 153 हथियार सौंपे थे, जिनमें महिला नक्सलियों की संख्या पुरुषों से अधिक थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा था कि सभी को पुनर्वास नीति के तहत मकान, जमीन और तीन साल तक आर्थिक सहायता दी जाएगी।

दीपक बैज के बयान के बाद एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति में झीरम घाटी कांड की याद ताजा हो गई है। 2013 में हुए इस हमले में कांग्रेस के कई शीर्ष नेता मारे गए थे। अब जब नक्सली सरेंडर की नई लहर चल रही है, विपक्ष इसे “राजनीतिक साजिश” करार दे रहा है, जबकि सरकार इसे “शांति और विकास की दिशा में बड़ी उपलब्धि” बता रही है।

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