5 साल से नहीं हुई परामर्शदात्री समिति की बैठक, कर्मचारियों में नाराजगी; जिलाध्यक्ष भानु प्रताप यादव ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष भानु प्रताप यादव ने जिला प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पिछले पांच वर्षों से जिला स्तरीय संयुक्त परामर्शदात्री समिति की बैठक नहीं बुलाई गई है, जबकि शासन के नियमों के अनुसार हर तीन महीने में बैठक होना अनिवार्य है।
जिलाध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने अब तक ग्यारह बार जिला प्रशासन को पत्र लिखकर बैठक आयोजित करने की मांग की, लेकिन मान्यता प्राप्त संघ के पत्रों को लगातार अनदेखा किया जा रहा है। आखिरी बार यह बैठक 5 फरवरी 2020 को हुई थी, उसके बाद से आज तक समिति की कोई बैठक नहीं हुई।
उन्होंने बताया कि शासन के परिपत्र दिनांक 27/10/2006 और सामान्य प्रशासन विभाग के नवीन निर्देश दिनांक 10/11/2025 के अनुसार विभागीय और जिला स्तरीय परामर्शदात्री समिति की बैठक 15 दिसंबर 2025 तक हर हाल में आयोजित करना अनिवार्य है। इसके बावजूद जिला स्तर पर बैठक न होने से कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
बैठक न होने का सीधा असर कर्मचारियों पर पड़ा है-
- विभागीय पदोन्नति और समयमान वेतनमान लंबित
- वरिष्ठता सूची जारी नहीं
- सेवा पुस्तिका अपडेट नहीं
- सेवानिवृत्ति के बाद देय भुगतान में देरी
- पेंशन और अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण अटके
- चिकित्सा और यात्रा भत्ता के भुगतान लंबित
- मातृत्व और संतान पालन अवकाश पर गई महिला कर्मचारियों के वेतन प्रकरण भी अघटन
इन समस्याओं के कारण कर्मचारियों में गहरा असंतोष है।
जिलाध्यक्ष भानु प्रताप यादव ने इन मुद्दों को लेकर कलेक्टर दुर्ग को ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर बैठक जल्द नहीं बुलाई गई, तो कर्मचारी संघ आगे की रणनीति तय करेगा।





