हज की वजह से अमेरिका ने नहीं किया ईरान पर हमला, यूएई और सऊदी ने कैसे मनाया?

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर एक बार फिर से बातचीत शुरू हो गई है. इससे पहले 19 मई यानी मंगलवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर हमले को लेकर फैसला लेने वाले थे, लेकिन आखिरी वक्त में उन्होंने बातचीत का रास्ता चुना. ट्रंप ने यह फैसला खाड़ी देश सऊदी और संयुक्त अरब अमीरात के कहने पर लिया.मिडिल ईस्ट आई ने अरब सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट की है. इसके मुताबिक सऊदी और यूएई ने अमेरिका से कहा कि अभी हज चल रहा है. इसके लिए दुनिया के कई देशों से मुसलमान सऊदी आए हैं. अभी अगर जंग की शुरुआत होती है तो स्थिति खराब हो जाएगी. लाखों लोग सऊदी में फंस जाएंगे.सऊदी ने ट्रंप से कहा कि इसके बाद अरब के मुसलमानों में भी वाशिंगटन की खराब छवि बनेगी. रिपोर्ट के मुताबिक इस साल हज यात्रा 24 मई से शुरू होगी और छह दिनों तक चलेगी. हज यात्रा के लिए दुनियाभर के 10 लाख मुसलमान आ सकते हैं.सऊदी और यूएई का कहना था कि अगर ईरान पर अमेरिका हमला करता है तो ईरान जवाबी कार्रवाई के तहत रियाद और अबू धाबी पर हमला करेगा.
हज से पहले परमाणु समझौते की कोशिश
अल अरबिया के मुताबिक अमेरिका की कोशिश हज से पहले परमाणु समझौते की है. कतर ने एक ज्ञापन के तौर पर ईरान को अमेरिका के हवाले से प्रस्ताव भेजा है. इस प्रस्ताव में अस्थाई तौर पर समझौता करने की बात कही गई है. यह अगर हो जाता है तो फिर विस्तृत समझौते के लिए हज के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बैठक कराई जाएगी.
ब्लूमबर्ग ने ईरान मीडिया के हवाले से अमेरिका के नए प्रस्ताव को समझौता योग्य बताया है. हालांकि, ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई संवर्धित यूरेनियम को विदेश शिफ्ट करने के लिए तैयार नहीं हैं. मुज्तबा का मानना है कि इस फैसले से ईरान की स्थिति कमजोर होगी.
रमजान में किया था ईरान पर हमला
28 फरवरी को ईरान पर इजराइल और अमेरिका ने हमला किया था. उस वक्त रमजान का महीना चल रहा था. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या भी रमजान के महीने में ही की गई. इतना ही नहीं, ईद के दिन भी इजराइल और अमेरिका का हमला ईरान पर जारी था. हालांकि, जब ईरान ने मजबूती से होर्मुज को बंद कर दिया, तब जाकर अमेरिका ने समझौते की पहल की.





