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बिलासपुर एयरपोर्ट को बड़ी राहत: 150 करोड़ के प्रावधान से विस्तार की राह साफ, नई उड़ानों की उम्मीद

बिलासपुर के बिलासा बाई केवट एयरपोर्ट के विस्तार को लेकर बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। वर्षों से अटकी सेना की जमीन अधिग्रहण की समस्या अब दूर होती नजर आ रही है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश किए गए अनुपूरक बजट में इसके लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जल्द मंजूरी का भरोसा दिलाते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से इस विषय पर सीधी बातचीत भी की है। इस फैसले से बिलासपुर सहित पूरे संभाग के लोगों में एक बार फिर उम्मीद जगी है।

करीब छह साल से धरना-प्रदर्शन और आंदोलनों के जरिए उठ रही मांग अब रंग लाती दिख रही है। बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C कैटेगरी में विकसित करने की राह में सबसे बड़ी अड़चन सेना की जमीन थी, जिसकी कीमत को लेकर राज्य सरकार और सेना के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी। अब अनुपूरक बजट में 150 करोड़ रुपये की मंजूरी देकर इस अड़चन को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति के अनुसार इस राशि से लगभग 1012 एकड़ सेना की जमीन अधिग्रहित करने का प्रस्ताव है, जिससे रनवे विस्तार और आधुनिक टर्मिनल निर्माण का काम संभव हो सकेगा।

जानकारी के मुताबिक रनवे विस्तार के लिए कम से कम 290 एकड़ जमीन की जरूरत है। यदि सेना की जमीन उपलब्ध हो जाती है, तो जरूरी भूमि के साथ अतिरिक्त क्षेत्र भी एयरपोर्ट के पास रहेगा, जिससे भविष्य में एयरपोर्ट को और विस्तार देने में आसानी होगी। जमीन मिलते ही रनवे बढ़ाने, नए टर्मिनल और आधुनिक हवाई सुविधाओं के निर्माण का काम शुरू किया जाएगा, जिससे बिलासपुर संभाग को सीधी हवाई सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।

एयरपोर्ट विस्तार की खबर के बाद जहां आम लोगों में खुशी है, वहीं सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा इसे बिलासपुर के हित में ऐतिहासिक फैसला बता रही है और पिछली कांग्रेस सरकार पर गंभीर कदम न उठाने का आरोप लगा रही है। वहीं कांग्रेस अपने कार्यकाल में किए गए प्रयासों और बजट प्रावधानों का हवाला देकर जवाब दे रही है।

कुल मिलाकर वर्षों से लटका सेना की जमीन अधिग्रहण का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। यदि अंतिम सहमति बन जाती है, तो बिलासपुर को एक आधुनिक और पूर्ण विकसित 4C एयरपोर्ट मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा, जिससे व्यापार, उद्योग और पर्यटन को नई गति मिलेगी।

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