मध्यप्रदेश–महाराष्ट्र–छत्तीसगढ़ जोन प्रभारी समेत 12 माओवादी आत्मसमर्पण, 87 लाख के इनामीयों ने हथियार डाले

छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ (केसीजी) जिले में माओवादी उन्मूलन अभियान को बड़ी सफलता मिली है। बकरकट्टा थाना क्षेत्र के कुम्ही गांव में सीपीआई (माओवादी) के 12 कैडरों ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण किया। ये सभी कुल 10 हथियारों के साथ सामने आए, जिनमें एके-47, इंसास, एसएलआर, 303 और 30 कैलिबर कार्बाइन शामिल हैं।
आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे बड़ा नाम 45 लाख के इनामी और केंद्रीय समिति सदस्य (सीसीएम) रामधेर मज्जी का है, जो हाल ही में मध्यप्रदेश–महाराष्ट्र–छत्तीसगढ़ (एमएमसी) जोन प्रभारी नियुक्त किए गए थे। यह वही जोन है जहां कुछ दिन पहले माओवादी प्रवक्ता अनंत ने अपने साथियों के साथ समर्पण किया था। लगातार हो रहे आत्मसमर्पण से संगठन की टॉप लेवल संरचना हिल चुकी है।
रामधेर के अलावा आठ–आठ लाख रुपए के चार इनामी डीवीसीएम—चंदू उसेंडी, ललिता, जानकी और प्रेम—ने भी संगठन छोड़ा। इनके साथ पांच–पांच लाख के दो एरिया कमेटी सदस्य रामसिंह दादा और सुकेश पोट्टम, तथा दो–दो लाख के इनामी लक्ष्मी, शीला, सागर, कविता और योगिता ने भी आत्मसमर्पण किया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, एमएमसी जोन में प्रवक्ता अनंत और प्रभारी रामधेर दोनों का आत्मसमर्पण संगठन के लिए बड़ा नेतृत्व संकट बन चुका है। बस्तर क्षेत्र में पहले ही कई बड़े माओवादी ढांचे कमजोर हो चुके हैं। हिड़मा की मौत के बाद अब केवल उसका करीबी बारसे देवा ही संगठन में बड़ा चेहरा बचा है।
यह घटनाक्रम माओवादी संगठन की कमजोर होती पकड़ और तेजी से हो रही गिरावट को स्पष्ट रूप से दिखाता है।





