चार दशक बाद अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर माओवाद से मुक्त, अमित शाह ने की घोषणा

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र से माओवाद का अंत अब ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की है कि अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर अब माओवादियों के आतंक से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि दक्षिण बस्तर के कुछ इलाकों में अब भी नाममात्र प्रभाव बचा है, जिसे सुरक्षा बल जल्द ही समाप्त कर देंगे।

गृह मंत्री ने बताया कि पिछले दो दिनों में अबूझमाड़ क्षेत्र में सक्रिय 190 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनमें एक करोड़ के इनामी माओवादी रूपेश भी शामिल हैं। इससे पहले छह करोड़ के इनामी माओवादी भूपति ने महाराष्ट्र में 60 साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया था। अब माड़ डिविजन और रावघाट एरिया कमेटी के कुल 190 माओवादियों ने भी हथियार डाल दिए हैं।

करीब 4,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले अबूझमाड़ के घने जंगल, ऊंचे पहाड़ और गहरी घाटियां कभी माओवादियों की शरणस्थली हुआ करते थे। यहां 237 गांव ऐसे थे जहां प्रशासन की पहुंच लगभग असंभव थी। महाराष्ट्र और तेलंगाना की सीमा से सटे इस क्षेत्र में लंबे समय तक माओवादी संगठन सक्रिय रहे, लेकिन सुरक्षा बलों की रणनीतिक कार्रवाई और निरंतर अभियानों ने इस स्थिति को बदल दिया।

राज्य सरकार की ‘आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025’ और ‘नियद नेल्ला नार’ योजना ने इस परिवर्तन में अहम भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर के माओवादमुक्त होने से बस्तर शांति और विकास के नए युग में प्रवेश कर चुका है।

अमित शाह ने बताया कि जनवरी 2024 से अब तक राज्य में 2,100 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, 1,785 गिरफ्तार किए गए हैं और 477 मारे गए हैं। यह अभियान 31 मार्च 2026 तक माओवादी हिंसा को जड़ से खत्म करने के संकल्प के तहत जारी रहेगा।

अबूझमाड़ में जिन 140 माओवादियों ने हाल में समर्पण किया, वे इंद्रावती नदी पार कर पुलिस सुरक्षा घेरे में पहुंचे और शुक्रवार को जगदलपुर पुलिस लाइन में मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के सामने औपचारिक रूप से हथियार डालेंगे। यह अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण माना जा रहा है, जिसने दशकों से आतंक के प्रतीक रहे अबूझमाड़ को नई पहचान दी है।

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