सौम्या चौरसिया की अवैध संपत्ति मामले में 8,000 पृष्ठों की चार्जशीट दाखिल

छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव और राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया के खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने 8,000 पृष्ठों का अभियोग पत्र दाखिल किया है। यह मामला राज्य में अब तक का सबसे बड़ा ‘आय से अधिक संपत्ति’ का केस माना जा रहा है। ईओडब्ल्यू ने इसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत रायपुर के विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया।
जांच के अनुसार, सौम्या चौरसिया ने वर्ष 2019 से 2022 के बीच सर्वाधिक अवैध निवेश किया। उन्होंने अपने परिवार और परिचितों के नाम पर करीब 45 अचल संपत्तियों में बेनामी निवेश किया। ईओडब्ल्यू की रिपोर्ट में पाया गया कि इस दौरान उन्होंने 49 करोड़ 69 लाख 48 हजार 298 रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की, जो उनकी वैध आय से 1872.86 प्रतिशत अधिक थी।
सौम्या चौरसिया वर्ष 2008 बैच की राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं। उनकी प्रथम नियुक्ति डिप्टी कलेक्टर, बिलासपुर में हुई थी और 2019 में उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय में उप सचिव बनाया गया। उनके 17 वर्ष के सेवाकाल में उनकी कुल वैध आय लगभग 2.51 करोड़ रही, जबकि उन्होंने लगभग 50 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की।
जांच में यह भी सामने आया कि सौम्या ने कोयला, डीएमएफ और अन्य क्षेत्रों में कथित भ्रष्ट माध्यमों से धन अर्जित कर उसे विभिन्न संपत्तियों में निवेश किया। ईओडब्ल्यू ने सभी दस्तावेज, लेन-देन और संपत्ति संबंधी अभिलेखों को संकलित कर चार्जशीट न्यायालय में पेश किया है।
अधिकारियों ने बताया कि यह अब तक का सबसे बड़ा ‘आय से अधिक संपत्ति’ का मामला है और इसकी जांच में मिले सबूतों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई से छत्तीसगढ़ में सरकारी अधिकारियों के भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी चेतावनी भेजी गई है।
सौम्या चौरसिया के खिलाफ दाखिल चार्जशीट में उनकी अवैध कमाई और संपत्ति निवेश के विस्तृत विवरण शामिल हैं। यह मामला राज्य प्रशासनिक सेवा में उच्च पदों पर नियुक्त अधिकारियों की वित्तीय गतिविधियों पर निगरानी की आवश्यकता को भी उजागर करता है। EOW का कहना है कि न्यायालय में पेश चार्जशीट से पूरे मामले की गहराई और व्यापकता सामने आएगी।





