अंबिकापुर: “मोर गांव मोर पानी” अभियान के तहत जल संरक्षण पर ग्रामीणों को दिया गया प्रशिक्षण

अंबिकापुर। जिले में जल संरक्षण को लेकर चल रहे “मोर गांव मोर पानी” महाअभियान के अंतर्गत 2 जून से 6 जून तक जनपद पंचायतों में क्लस्टर स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस अभियान का मकसद गांव-गांव में वर्षा जल को संजोकर जल संकट से निपटना है।
इसी कड़ी में सोमवार को जनपद पंचायत अंबिकापुर के मेंड्राकला, सीतापुर के भुसु, लूण्ड्रा और लखनपुर के लटोरी क्लस्टर की ग्राम पंचायतों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में बड़ी संख्या में सरपंच, पंच, सचिव, रोजगार सहायक, ग्राम संगठन के अध्यक्ष, महिला स्व-सहायता समूह की सदस्याएं और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया।
क्या सिखाया गया प्रशिक्षण में?
प्रशिक्षण के दौरान कार्यक्रम अधिकारी और तकनीकी सहायकों ने “मोर गांव मोर पानी” अभियान के तहत किए जाने वाले कार्यों की जानकारी दी। साथ ही, एक लघु फिल्म और प्रस्तुतिकरण के जरिए वर्षा जल संग्रहण और जल संरक्षण की तकनीकों को समझाया गया।
“रिज टू वैली” मॉडल के बारे में बताया गया, जिसके तहत पहाड़ियों से बहते पानी को गांवों में रोककर चेकडैम, स्टॉपडैम और परकोलेशन टैंक जैसे संरचनाओं से जल संरक्षण किया जा सकता है। इससे न केवल भूजल स्तर बढ़ेगा बल्कि खेती और आजीविका के साधनों में भी सुधार होगा।
जल शपथ भी दिलाई गई
प्रशिक्षण के अंत में सभी प्रतिभागियों को जल शपथ दिलाई गई। इसमें सभी ने यह संकल्प लिया कि वे जल को बचाने और उसकी हर बूंद की कीमत समझने के लिए पूरी जिम्मेदारी से काम करेंगे।
इस मौके पर संबंधित क्लस्टरों के सरपंच, पंच, ग्राम सचिव, रोजगार सहायक, महिला समूह की सदस्याएं और ग्रामीण मौजूद रहे। यह कार्यक्रम ग्रामीणों में जल के महत्व को समझाने और उन्हें सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हो रहा है।





