सड़क पर खड़े ठेले, रेंगती गाड़ियां – ये है स्मार्ट सिटी?

बिलासपुर – छत्तीसगढ़ की न्यायधानी और देश के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल शहर बिलासपुर की सड़कों पर इन दिनों अव्यवस्था और अराजकता साफ नजर आ रही है। सड़कों पर खड़े ठेले, गली-चौराहों पर पसरी चौपाटियां, रेंगती ट्रैफिक और अवैध पार्किंग—यह सवाल खड़ा करती है कि क्या यही है स्मार्ट सिटी की तस्वीर?
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नगर निगम की ओर से शहर में लगभग 1200 वेंडिंग जोन तय किए गए हैं, लेकिन 5000 से अधिक ठेले व खोमचे आज भी शहर के मुख्य मार्गों पर कब्जा जमाए हुए हैं। हालत यह है कि श्रीकांत वर्मा मार्ग, सरकंडा, सुभाष चौक, मंगला रोड, नेहरू नगर और शनिचरी रपटा जैसी प्रमुख सड़कों पर ठेले-खोमचों ने ट्रैफिक को 10 से 15 फीट तक सिकोड़ दिया है।

करोड़ों खर्च, व्यवस्था वहीं की वहीं
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत रिवर व्यू रोड पर आधुनिक कियोस्क लगाए गए थे, लेकिन आम जनता को इनका लाभ आज तक नहीं मिला। दूसरी ओर व्यापार विहार रोड (25 करोड़ रुपए) और मिट्टी तेल रोड (7 करोड़ रुपए) जैसी महंगी सड़कों को भी ठेले और बेतरतीब वाहनों ने संकरा और अव्यवस्थित बना दिया है।

बिना अनुमति के फल-फूल रही चौपाटियां
तेलीपारा, अमलीपारा, दयालबंद और बस स्टैंड क्षेत्र ऐसे स्थान हैं, जहां बिना किसी लाइसेंस या अनुमति के गुपचुप, चाट और नाश्ते की दुकानें सड़क किनारे कब्जा जमा चुकी हैं। निगम की ओर से कुछ जगहों को लाइसेंस जरूर दिए गए हैं, लेकिन ज़मीनी हालात बतातें हैं कि अव्यवस्था ज्यादा, व्यवस्था कम है।

पुलिस-निगम की कार्रवाई औपचारिक
हाल ही में नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर कुछ ठेले हटाए, चेतावनी दी, लेकिन यह कवायद स्थायी समाधान की दिशा में नाकाफी साबित हो रही है। लंबे समय से प्रस्तावित वेंडिंग जोन – जैसे कि इमलीपारा रोड, नेहरू नगर, शनिचरी रपटा – आज भी अधर में हैं।

सवाल उठता है..
क्या करोड़ों की स्मार्ट सड़कें इसलिए बनी थीं कि उन पर चौपाटियां सजें और यातायात थम जाए? क्या वेंडिंग जोन सिर्फ फाइलों और घोषणाओं तक ही सीमित रहेंगे?

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