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बिलासपुर:सड़क सफाई की समस्या से लोग परेशान, जनप्रतिनिधि नहीं दे रहे ध्यान

बिलासपुरबेलतरा विधानसभा के नगर निगम में शामिल किए गए नए वार्डों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी देखी जा रही है। छह साल पहले जब इन ग्राम पंचायतों और नगर पंचायतों को नगर निगम में शामिल किया गया था, तब लोगों को उम्मीद थी कि उनकी सुविधाएं बेहतर होंगी। लेकिन आज भी हालात जस के तस हैं। यहां के लोग सड़क, पानी और सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं और जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासन तक कोई ध्यान नहीं दे रहा।

बेलतरा विधानसभा के अंतर्गत आने वाले लगभग 17 वार्डों में से 10 वार्ड ग्रामीण क्षेत्रों के हैं, जिन्हें नगर निगम सीमा में शामिल किया गया था। नगर निगम के क्षेत्र विस्तार का उद्देश्य इन क्षेत्रों में सुविधाएं उपलब्ध कराना था, लेकिन आज भी लोग उन सुविधाओं के इंतजार में हैं।

सड़क और सफाई की स्थिति खराब

लोगों का कहना है कि सड़कें पूरी तरह से खराब हो चुकी हैं और सफाई व्यवस्था का तो कोई नामो-निशान नहीं है। गर्मी के दिनों में पानी की समस्या और भी बढ़ जाती है। कई बार लोगों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रखी हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिलता है।

वादा और हकीकत में अंतर

चुनाव के समय वादों की झड़ी लगा दी जाती है, लेकिन चुनाव बीतते ही वे वादे भी कहीं खो जाते हैं। लोग यह सोचते हैं कि वे टैक्स इसलिए देते हैं ताकि उन्हें सड़क, पानी और सफाई की बेहतर सुविधाएं मिल सकें। लेकिन मौजूदा हालात को देखकर ऐसा लगता है कि उनकी जरूरतों की अनदेखी की जा रही है।

बेलतरा विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग नगर निगम और जनप्रतिनिधियों दोनों से नाराज हैं। उनका कहना है कि चुनाव में वोट मांगने के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में किसी को कोई परवाह नहीं होती।

समस्याओं का समाधान कब होगा?

अगर जनप्रतिनिधि वाकई में लोगों की भलाई चाहते हैं, तो उन्हें केवल घोषणाओं और भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जमीनी स्तर पर उतरकर काम करना होगा। चुनाव जीतने के बाद भी यदि जनप्रतिनिधि समस्याओं का समाधान करने में रुचि दिखाएं, तो जनता का विश्वास बना रहेगा।

बेलतरा विधानसभा के लोग अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर कब उनकी समस्याओं का समाधान होगा? कब वे भी बाकी शहर की तरह सुविधाओं का लाभ उठा पाएंगे? अब देखना यह है कि जनप्रतिनिधि और प्रशासन इस ओर कब ध्यान देते हैं।

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