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कांग्रेस पी सी: बिलासपुर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का निजीकरण,कांग्रेस ने खोला ‘पीपीपी मॉडल’ का काला चिट्ठा…..

200 करोड़ के अस्पताल पर सियासत तेज, निजी हाथों में सौंपने की साजिश का आरोप.....

बिलासपुर से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है।(कांग्रेस पी सी) जनता के 200 करोड़ रुपये से तैयार सुपर स्पेशलिटी और कैंसर केयर अस्पताल को लेकर कांग्रेस ने बड़ा खुलासा किया है। पार्टी का आरोप है कि सरकारी मशीनरी और भवन को अब गुपचुप तरीके से निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है। कांग्रेस ने प्रेस वार्ता के दौरान कुछ गोपनीय शासकीय दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए सरकार की मंशा पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। क्या है यह पूरा मामला और क्यों मचा है सियासी गलियारों में हड़कंप? देखिए इस रिपोर्ट में…….

कांग्रेस ने उठाए सवाल, (कांग्रेस पी सी)

कांग्रेस ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार करते हुए पूछा है कि जब अस्पताल का निर्माण सरकारी जमीन और जनता के टैक्स के पैसे से हुआ है, तो संचालन निजी कंपनी के हवाले क्यों किया जा रहा है? पार्टी ने स्पष्ट किया कि 29 अक्टूबर 2024 को प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन के बावजूद, डेढ़ साल बाद भी अस्पताल पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो पा रहा है, जिससे मरीज रेफर होने को मजबूर हैं। कांग्रेस ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के 10 जून और 23 जून 2026 के पत्र दिखाकर दावा किया कि सरकार ने ‘केपीएमजी’ जैसी संस्था को कंसल्टेंट बनाकर टेंडर प्रक्रिया तेज कर दी है….

इस पूरी कवायद को लेकर गरीब और मध्यम वर्ग के स्वास्थ्य अधिकारों पर खतरा मंडराने लगा है। कांग्रेस का कहना है कि स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के नाम पर बना यह अस्पताल जनभावनाओं का प्रतीक है, लेकिन पीपीपी मॉडल के आने से उपचार महंगा होना तय है। पार्टी ने सरकार से पूछा है कि निजी हाथों में अस्पताल जाने के बाद इलाज की दरें कौन तय करेगा और आयुष्मान योजना के इतर सामान्य मरीजों का क्या होगा? यह डर जताया जा रहा है कि यह विशाल परिसर कहीं केवल धनवानों के उपचार का अड्डा बनकर न रह जाए…….

निजी हाथों में सौंपने की साजिश का आरोप.

इस राजनीतिक घमासान में स्थानीय विधायक सुशांत शुक्ला भी कांग्रेस के निशाने पर हैं। पूर्व जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी ने आरोप लगाया कि विधायक गंभीर जनहित के मुद्दों पर जवाब देने के बजाय राजनीति कर रहे हैं। कांग्रेस ने अस्पताल में डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। सरकार से मांग की गई है कि अस्पताल के लिए स्वीकृत पदों का विवरण सार्वजनिक किया जाए और खाली पदों को जल्द से जल्द भरा जाए, ताकि बिलासपुर की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें……

कांग्रेस ने सरकार को चेतावनी देते हुए दो टूक मांग की है कि 200 करोड़ की लागत वाले इस अस्पताल को बिना किसी निजी हस्तक्षेप के सरकारी स्तर पर तत्काल पूरी क्षमता से शुरू किया जाए। पार्टी ने यह भी कहा कि अगर पीपीपी मॉडल लागू करना ही है, तो गरीब मरीजों के मुफ्त इलाज की लिखित गारंटी दी जाए और अस्पताल से जुड़े सभी गुप्त दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाए। अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट करती है या फिर आंदोलन की राह और तेज होती है….

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