प्रेमिका और उसकी मासूम बेटी की हत्या मामले में उम्रकैद बरकरार: हाईकोर्ट ने कहा- बेहद क्रूर और सुनियोजित वारदात

छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुए दोहरे हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है। कोर्ट ने इस घटना को बेहद क्रूर और बर्बर बताते हुए कहा कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से प्रेमिका और उसकी मासूम बेटी की हत्या की थी। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने की।
शादी के दबाव से बचने के लिए की हत्या
मामला रायपुर के तेलीबांधा इलाके का है, जहां विक्की उर्फ सुखीराम यादव के खिलाफ युवती ने पहले दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। आरोपी इस केस में जेल भी गया था और बाद में जमानत पर बाहर आया। बताया गया कि युवती लगातार उस पर शादी करने का दबाव बना रही थी और मना करने पर रेप केस में सजा दिलाने की बात कहती थी।
इसी विवाद के चलते आरोपी ने 22 जनवरी 2021 की रात युवती को मिलने के लिए बुलाया और चाकू से उसका गला रेत दिया। इसके बाद उसने मृतका की छोटी बेटी को रेलवे ट्रैक पर छोड़ दिया, जहां मालगाड़ी की चपेट में आने से बच्ची की मौत हो गई।
हाईकोर्ट ने माना सुनियोजित अपराध
ट्रायल कोर्ट ने जुलाई 2022 में आरोपी को हत्या और सबूत मिटाने के आरोप में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। आरोपी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी और दावा किया कि घटना अचानक गुस्से में हुई थी तथा उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी।
हालांकि हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी पहले से धमकी दे चुका था और वह चाकू लेकर मौके पर पहुंचा था, जिससे साफ है कि हत्या पहले से सोची-समझी थी। अदालत ने डीएनए और एफएसएल रिपोर्ट को भी अहम साक्ष्य माना।
सबूतों से साबित हुई आरोपी की संलिप्तता
जांच के दौरान आरोपी के कपड़ों और बरामद चाकू पर इंसानी खून के निशान मिले थे। कोर्ट ने माना कि वैज्ञानिक साक्ष्य आरोपी की भूमिका को पूरी तरह साबित करते हैं। फैसले में कहा गया कि यह अपराध न सिर्फ कानून के खिलाफ है बल्कि मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला भी है।





