जिला अस्पताल आरोप: जिला अस्पताल में प्रसूता के इलाज में लापरवाही का आरोप, ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत
तीन दिन बाद छुट्टी, हालत बिगड़ी तो निजी अस्पताल पहुंची प्रसूता; कलेक्टर ने जांच के दिए निर्देश

बिलासपुर के जिला अस्पताल में प्रसूता के इलाज और ऑपरेशन में लापरवाही का गंभीर आरोप सामने आया है।(जिला अस्पताल आरोप) तखतपुर निवासी पवन देवांगन ने कलेक्टर से शिकायत कर डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के मुताबिक 27 जुलाई को प्रसव पीड़ा के बाद उनकी पत्नी ज्योति को जिला अस्पताल लाया गया, जहां ऑपरेशन के बाद उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई। आरोप है कि हालत सामान्य नहीं होने के बावजूद तीन दिन बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। इसके बाद तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर परिजनों को उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। मामले में कलेक्टर ने सीएमएचओ को जांच टीम गठित कर जांच के निर्देश दिए हैं
कलेक्टर ने जांच के दिए निर्देश (जिला अस्पताल आरोप)
जिस जिला अस्पताल में मरीजों को बेहतर और सुरक्षित इलाज की उम्मीद होती है, वहीं प्रसूता के इलाज को लेकर सामने आए इस मामले ने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता पवन देवांगन का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद उनकी पत्नी ज्योति की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी, लेकिन इसके बावजूद तीन दिन बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
परिवार का कहना है कि अगर मरीज की हालत ठीक थी तो छुट्टी के कुछ ही समय बाद उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत क्यों आई, और अगर हालत गंभीर थी तो अस्पताल से छुट्टी देने का फैसला किस आधार पर लिया गया। यही सवाल अब पूरे मामले की जांच का केंद्र है। शिकायत में पवन देवांगन ने डॉक्टर केके मित्तल का लाइसेंस रद्द करने के साथ अस्पताल प्रबंधन पर भी कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी…
जिला अस्पताल में प्रसूता के इलाज में लापरवाही का आरोप
मामला सामने आने के बाद कलेक्टर संजय अग्रवाल ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सीएमएचओ को जांच टीम गठित कर पूरे प्रकरण की जांच कराने और आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब सवाल यह है कि प्रसूता के इलाज के दौरान आखिर ऐसी कौन सी स्थिति बनी कि ऑपरेशन के महज तीन दिन बाद छुट्टी मिलने के बाद उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
सरकारी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे परिवार को अगर बाद में निजी अस्पताल का सहारा लेना पड़े, तो निश्चित तौर पर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है। लेकिन आरोप और हकीकत के बीच का फैसला जांच रिपोर्ट करेगी। जांच में अगर इलाज में लापरवाही या नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय होगी। वहीं अगर आरोप सही नहीं पाए जाते हैं, तो वास्तविक स्थिति भी सामने आएगी। फिलहाल जांच शुरू होने के बाद सभी की नजर रिपोर्ट पर टिकी है.





