चंडीगढ़ मेयर चुनाव में फिर कांटे की टक्कर, सीमित संख्या के बावजूद बीजेपी कैसे रही प्रभावी

चंडीगढ़ में मेयर चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। आगामी चुनाव में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देने का फैसला किया है। सदन में दोनों पक्षों के पास बराबर-बराबर 18-18 वोट हैं, जिससे मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया है। बहुमत किसी के पास न होने की स्थिति में परिणाम किस्मत के भरोसे भी जा सकता है।

आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच हुए समझौते के तहत मेयर पद के लिए आम आदमी पार्टी प्रत्याशी उतारेगी, जबकि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद पर कांग्रेस चुनाव लड़ेगी। दोनों दलों का कहना है कि यह गठबंधन केवल मेयर चुनाव तक सीमित है और आगे होने वाले नगर निगम चुनाव वे अलग-अलग लड़ेंगे। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य मेयर चुनाव में बीजेपी को रोकना बताया जा रहा है।

हाल के दिनों में बीजेपी की स्थिति और मजबूत हुई है। आम आदमी पार्टी की दो पार्षदों के दल बदल के बाद बीजेपी के पार्षदों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है। यह चुनाव 2022 में चुनी गई नगर निगम का अंतिम मेयर चुनाव होगा। खास बात यह है कि पहली बार मेयर का चुनाव गुप्त मतदान के बजाय खुले तौर पर हाथ उठाकर किया जाएगा, जिससे क्रॉस-वोटिंग और गड़बड़ी पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।

बीते चार वर्षों में बीजेपी ने तीन बार मेयर पद पर जीत दर्ज की है, जबकि कई मौकों पर उसके पास स्पष्ट बहुमत नहीं था। इसका मुख्य कारण क्रॉस-वोटिंग और विपक्षी दलों के बीच तालमेल की कमी रही है। एक चुनाव में तो विपक्ष के अधिक पार्षद होने के बावजूद बीजेपी प्रत्याशी मामूली अंतर से जीत हासिल करने में सफल रही थी।

एक वर्ष का मेयर चुनाव चंडीगढ़ के राजनीतिक इतिहास में काफी विवादित रहा, जब मतदान प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगे। मामला न्यायालय तक पहुंचा और अंततः विपक्षी प्रत्याशी को विजेता घोषित किया गया। इस घटना ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया था और इसका असर बाद के चुनावों में भी देखने को मिला।

इन सभी घटनाक्रमों के बीच एक बार फिर मेयर चुनाव पर सबकी नजरें टिकी हैं। बराबरी की संख्या, गठबंधन की मजबूती और पिछली राजनीतिक घटनाओं को देखते हुए यह चुनाव चंडीगढ़ की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

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