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विश्व एड्स दिवस 2025: बिलासपुर में बढ़ते एचआईवी मामले, 10 साल में 5100 से अधिक मरीज मिले

बिलासपुर संभाग में एचआईवी-एड्स के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और यह स्वास्थ्य विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। साल 2016 से 2025 तक जिले में कुल 5108 एड्स मरीज सामने आ चुके हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, जिले में रोजाना औसतन एक से दो नए मरीजों की पहचान हो रही है, जो संक्रमण की तेज़ रफ्तार को दर्शाता है।

सिम्स (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान) के एआरटी सेंटर द्वारा इन मरीजों की पहचान और इलाज किया जा रहा है। केंद्र का प्रमुख उद्देश्य न केवल मरीजों का उपचार जारी रखना है, बल्कि उन्हें दवाओं और परामर्श के ज़रिये सामान्य जीवन की ओर वापस लाना भी है। डॉक्टरों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि अब भी लगभग आधे संक्रमित मरीजों की पहचान नहीं हो पाई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल 31 अक्टूबर तक 356 नए एड्स मरीज मिल चुके थे, जबकि नवंबर के अंत तक 11 महीनों में कुल 352 मरीजों की पुष्टि हुई। विशेषज्ञों की चिंता इसलिए भी बढ़ी है, क्योंकि मरीजों में इंजेक्शन के जरिए नशा करने वाले लोगों की बड़ी संख्या शामिल है। संक्रमित सुई का बार-बार उपयोग, एचआईवी फैलने का प्रमुख कारण बन रहा है।

ओएसटी (ओरल सब्स्टीट्यूशन थेरेपी) सेंटर में इंजेक्शन से नशा करने वाले 3000 से अधिक लोगों का इलाज जारी है। इनमें से 600 से अधिक व्यक्ति एचआईवी से संक्रमित पाए गए, जबकि 30 से अधिक मरीज जानकारी व उपचार की कमी के कारण समय के साथ एड्स की श्रेणी में पहुंच गए।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि लोगों को संक्रमण के जोखिम, बचाव और शुरुआती इलाज के महत्व से अवगत कराया जा सके। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल इलाज केंद्र खोल देना पर्याप्त नहीं है, संक्रमित मरीजों की पहचान, काउंसलिंग और उपचार के लिए व्यापक और जमीनी स्तर पर काम करने की ज़रूरत है।

एचआईवी एक ऐसा वायरस है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है, जिससे व्यक्ति कई गंभीर बीमारियों की चपेट में जल्दी आ जाता है। इसी उन्नत अवस्था को एड्स कहा जाता है।

संक्रमण फैलने के मुख्य कारणों में असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई का बार-बार उपयोग, वेश्यावृत्ति, और एचआईवी संक्रमित मां से बच्चे में संक्रमण शामिल हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वे एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि महिलाओं में एचआईवी को लेकर जागरूकता में सुधार हुआ है। पहले केवल 20 प्रतिशत महिलाएं इस बीमारी के बारे में जानती थीं, जो अब बढ़कर 23 प्रतिशत हो गई है। वहीं, कंडोम के उपयोग से संक्रमण से बचाव की जानकारी 57 प्रतिशत से बढ़कर 76 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

बिलासपुर में बढ़ते मामलों ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि एड्स के खिलाफ लड़ाई, सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि समाज में जागरूकता, सावधानी और सही जानकारी तक पहुंच सुनिश्चित करना बेहद ज़रूरी है।

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