पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य क्यों हुए गिरफ्तार? जानिये शुरू से अभी तक की कहानी…

चैतन्य क्यों हुए गिरफ्तार
पूर्व मुख्यमंत्री और पाटन विधायक भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार कर लिया है। और उन्हें पांच दिन के लिए रिमांड पर ले लिया है चैतन्य पर आरोप है कि उन्होंने हजार करोड़ से ज्यादा की अवैध कमाई को वैध दिखाने की कोशिश की।
तो आखिर ये पूरा मामला क्या है , किस सबूत के विनाब पे ये गिरफ्तारी हुई है , कैसे हुआ खुलासा और कौन-कौन इस खेल में शामिल हैं, चलिए विस्तार से समझते हैं। जिसके लिए आपको ये वीडियो पूरा देखना होगा,

तो सबसे पहले शुरुआत करते हैं चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी से

तो 18 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय यानी ed भूपेश बघेल के भिलाई स्थित ने निवास पहुँचती है और वहा से चैतन्य बघेल को गिरफ्तार कर रायपुर की अदालत में पेश करती है और ED कोर्ट को ये बताती है है कीचैतन्य बघेल आबकारी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और लेयरिंग में शामिल हैं।
ईडी का आरोप है कि चैतन्य को घोटाले की कमाई होटल कारोबारी अनवर ढेबर, दीपेन चावड़ा और पप्पू बंसल के जरिए मिली।
उस पैसों को चैतन्य ने अपनी रियल एस्टेट कंपनियों और अन्य माध्यमों से इन्वेस्ट किया।

ईडी के मुताबिक: चैतन्य की कंपनी बघेल डेवलपर्स में विट्ठल ग्रीन परियोजना के तहत निवेश दिखाया गया।
जहाँ त्रिलोक सिंह ढिल्लन ने उनके प्रोजेक्ट में 19 फ्लैट्स खरीदे, जिनकी कीमत करीब 15 करोड़ रुपये थी।
और इसी जरिये परियोजना की लागत को कम दिखाया गया, जिससे टैक्स और जांच से बचा जा सके।

ईडी ने कोर्ट को बताया ये भी बताया की पप्पू बंसल, दीपेन चावड़ा, और अन्य आरोपियों के बयान चैतन्य के खिलाफ हैं। और इन बयानों के आधार पर ED ने छानबीन की और फिर चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया, ED ने ये भी बताया की आबकारी घोटाले की आपराधिक कमाई जो दीपेन चावड़ा,अनवर ढेबर से हासिल करते थे, वह लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल को सौंपा जाता था। इस राशि का कब कहां कैसा उपयोग होगा यह निर्देश चैतन्य बघेल देते थे। जांच और बयान का हवाला देते हुए यह बताया गया है कि, चर्चित कथित तांत्रिक के के श्रीवास्तव को 80 से 100 करोड़ की राशि दी गई थी।
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रामगोपाल अग्रवाल, कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष को भी रकम दी गई जो अब फरार बताए जा रहे हैं।

अब बताते है की चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी किन सबूतों के आधार पर हुई
10 मार्च और 15 जुलाई को ईडी ने भिलाई, बस्तर और रायपुर में दबिश दी। चैतन्य के घर से दस्तावेज, पेन ड्राइव और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए।
इन्हीं सबूतों की समीक्षा के बाद 18 जुलाई को चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया गया।

अब जानते हैं की कल कोर्ट के अन्दर क्या हुआ और ED ने कोर्ट से क्या कहा ?
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ईडी ने कोर्ट से कहा कि चैतन्य जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। उन्हें पांच दिन की सशर्त रिमांड पर लिया गया है ताकि अभिलेखों की जानकारी ली जा सके और गवाहों से आमने-सामने पूछताछ की जा सके।

अब जान लेते हैं की मनी लॉन्ड्रिंग और लेयरिंग क्या है?

मनी लॉन्ड्रिंग का मतलब अपराध से कमाई गई काली कमाई को सफेद बनाना। लेयरिंग का अर्थ उस राशि को बार-बार अलग-अलग माध्यमों से घुमा कर असली स्रोत छुपाना। तो साफ है चैतन्य भूपेश बघेल पर आरोप सीधे घोटाले में भागीदारी का नहीं,
बल्कि उस अवैध कमाई को वैध दिखाने की कानूनी और आर्थिक साज़िश में भागीदार होने का है।

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