खरीफ सीजन में खाद संकट गहराया, भूपेश बघेल ने सहकारी समितियों का किया निरीक्षण

खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही दुर्ग जिले के पाटन विधानसभा क्षेत्र में किसानों को खाद, बीज और डीएपी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों की शिकायतों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और पाटन विधायक भूपेश बघेल ने कई सहकारी समितियों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया।
किसानों ने बताई खाद और बीज की कमी
भूपेश बघेल ने पंडहोर, सोमनी, फेकारी, गाड़ाडीह, कुम्हली, जामगांव आर, बेलहारी निपानी, रानीतराई और सेलूद सहित कई समितियों का निरीक्षण किया। इस दौरान किसानों से सीधे बातचीत कर खाद, बीज और ऋण वितरण की स्थिति की जानकारी ली।
किसानों ने बताया कि समय पर खाद और बीज नहीं मिलने से बुवाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है। कई किसान ऋण पुस्तिका लेकर समितियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें आवश्यकता के अनुसार खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
डीएपी की कमी और वितरण व्यवस्था पर उठाए सवाल
निरीक्षण के बाद भूपेश बघेल ने कहा कि कई समितियों में डीएपी की भारी कमी बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि खाद वितरण की वर्तमान व्यवस्था किसानों के हित में नहीं है। उनके अनुसार छोटे और बड़े किसानों को समान मात्रा में खाद दी जा रही है, जिससे अधिक रकबे वाले किसानों को परेशानी हो रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके खाद दिए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एनपीके खाद किसानों के लिए अधिक महंगी साबित हो रही है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
रमन सिंह ने प्राकृतिक खेती अपनाने की दी सलाह
खाद संकट के मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अलग राय रखते हुए किसानों से प्राकृतिक और जैविक खेती को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि डीएपी, यूरिया और अन्य रासायनिक खादों के अधिक उपयोग का असर मिट्टी और मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि गोबर खाद और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी, उत्पादन टिकाऊ बनेगा और लोगों का स्वास्थ्य भी सुधरेगा। साथ ही उन्होंने किसानों को रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने की सलाह दी।





