यूपी चुनाव 2027: कांग्रेस ने की बड़ी तैयारी, 133 नए जिला और शहर अध्यक्षों की नियुक्ति

उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी कांग्रेस ने अभी से शुरू कर दी है। पार्टी ने पूरे राज्य में 133 नए जिला और शहर अध्यक्षों के नामों की घोषणा कर दी है। इस कदम को कांग्रेस का बड़ा दांव माना जा रहा है, जिसमें राहुल गांधी के सामाजिक न्याय के एजेंडे और प्रियंका गांधी के प्रभाव की झलक साफ दिख रही है।
पीडीए फार्मूला पर जोर
कांग्रेस ने इस बार ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फार्मूले पर खास ध्यान दिया है। पार्टी के नए संगठन में 133 में से 85 नेता ओबीसी, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं, जो कुल पदों का लगभग 65% हिस्सा बनाते हैं। इसमें 48 ओबीसी नेता शामिल हैं, जिनमें 33 हिंदू ओबीसी और 15 मुस्लिम ओबीसी हैं। इसके अलावा, 20 पद अनुसूचित जाति और जनजाति से जुड़े हैं। यह फैसला साफ दिखाता है कि कांग्रेस राहुल गांधी के सामाजिक न्याय वाले एजेंडे को संगठन में उतारने की कोशिश कर रही है।
सवर्ण समुदाय को भी मिली जगह
हालांकि, कांग्रेस ने सवर्ण समुदायों को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया है। 133 में से 49 पद सवर्ण समुदायों को दिए गए हैं, जिसमें 27 ब्राह्मण नेता शामिल हैं। ब्राह्मणों को 19% हिस्सेदारी दी गई है, जबकि ठाकुर समुदाय को 9%, वैश्य समुदाय को 3% और अन्य सवर्णों को भी 3% का प्रतिनिधित्व दिया गया है।
प्रियंका गांधी और राहुल गांधी का असर
पार्टी की नई लिस्ट में प्रियंका गांधी की टीम के कई करीबी नेता शामिल हैं। यह दिखाता है कि प्रियंका गांधी का संगठन में अब भी खासा प्रभाव है। वहीं, राहुल गांधी का सामाजिक न्याय का एजेंडा भी इस लिस्ट में साफ दिखाई दे रहा है।
युवा चेहरों को दी प्राथमिकता
कांग्रेस ने इस बार युवा नेताओं पर भी दांव लगाया है। नए 133 अध्यक्षों में से 84 नेता 21 से 50 साल की उम्र के हैं। इनमें 21 से 40 साल के 25 नेता और 41 से 50 साल के 59 नेता शामिल हैं। पार्टी का मानना है कि युवा नेतृत्व 2027 के चुनाव में नए जोश और ऊर्जा के साथ काम करेगा।
क्या सफल होगा कांग्रेस का दांव?
कांग्रेस ने इस बार सोशल इंजीनियरिंग का खासा ध्यान रखा है और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में पीडीए फार्मूले को अपना ट्रंप कार्ड बनाया है। जहां समाजवादी पार्टी (सपा) भी इसी एजेंडे पर चल रही है और बीजेपी भी ओबीसी-दलित समीकरण पर काम कर रही है, वहीं कांग्रेस का यह प्रयास उसे राज्य में अपनी खोई हुई जमीन वापस दिलाने में कितना सफल होगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
पार्टी के इस कदम से यह साफ है कि कांग्रेस इस बार यूपी में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती और पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने की कोशिश कर रही है।





